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स्त्री

एक महिला कुली जिसने शिक्षा की मशाल जगाई

दलित आंदोलन की सशक्त क्रांतिकारी नेत्री, दलित बच्चियों की पढ़ाई के लिए विशेष रुप से प्रथम कन्या विद्यालय चोखा मेला कन्या पाठशाला खोलने वाली…
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हमारे यहाँ लड़कियां बारात में नहीं जाती हैं..

बिहार के आरा जिले के एक गाँव के शादी घर में गए। बिहार में किसी शादी में जाने का पहला मौका था। घर में खूब चहल-पहल थी। बारात शाम चार बजे…
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तुम सत्ताधारी हो मैं सत्ताहीन

फर्क तुम्हारे और मेरे में फर्क क्या है। यही न जैविक रूप से तुम पुरुष हो मैं स्त्री। तुम सत्ताधारी हो मैं सत्ताहीन। लेकिन हैं तो हम…
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शहरों में अपनी जगह बनाती ग्रामीण और कस्बाई लड़कियों के संघर्ष

छोटे शहरों, गांवों और कस्बों से जाने कितने तरह के संघर्ष से जूझती लड़कियां आंखों में बड़े-बड़े सपने लिए शहर आती हैं। पढ़ती हैं, जॉब करती…
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लैंगिक असमानता और आर्थिक व सामाजिक विषमता से पार पाने का एक अभिनव विचार!

आर्थिक और सामाजिक गैर-बराबरी मानव जाति की सबसे बड़ी समस्या है, जिसकी उत्पत्ति विभिन्न सामाजिक समूहों के पुरुषों और उनकी महिलाओं के मध्य शक्ति…
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बढ़ती लैंगिक असमानता के बीच अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का क्या अर्थ है

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पिछले कुछ वर्षों में बाजार की पैनी नजर रही है और इसे बहुत चतुराई से एक बाजार संचालित उत्सव में बदल दिया गया है।…
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भारतीय स्त्री मुक्ति का दिन 25 दिसंबर

हम सब एक ऐसी मानवीय संस्कृति का निर्माण करना चाहते हैं, जहाँ हर इंसान आजादी की सांस ले सके, सम्मान  से जी सके और एक दूसरे को सम्मान दे सकें।…
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सभी जाति धर्म की स्त्रियों की तकलीफें एक जैसी हैं- सुगंधि फ्रांसिस (भाग -तीन)

तीसरा और अंतिम हिस्सा विवेक ने समाज को बदलने का जो बीड़ा उठाया था उसका एक रंग यह भी था कि स्वयं भी झोपड़पट्टी में रहकर झुग्गी - झोपड़ियों के…
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शिक्षा ही स्त्री मुक्ति का एकमात्र उपाय – सुगंधि फ्रांसिस (भाग -दो)

दूसरा हिस्सा   मेरा एक ही सपना था कि मेरे बच्चे मेरी तरह आधी अधूरी पढ़ाई न करे। मेरी बेटी पढ़ाई में तेज थी और उसने मेहनत करके दसवीं की…
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गरीबों-मज़लूमों के लिए जिनका घर कभी बंद नहीं होता (भाग – एक)

हाल ही में देखी एक फिल्म का दृश्य है - एक छोटे से कमरे में दो दोस्त दाखिल होते हैं। घुसते ही एक कह उठता है - ‘यह कैसा कमरा है भाई, शुरु होते…
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