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सिनेमा

कब तक रुके रहेंगे ये फैसले उर्फ सिनेमा में न्याय व्यवस्था का चित्रण

भारतीय संविधान में देश की राजव्यवस्था को संचालित करने के लिए व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की व्यवस्था की गई थी और इन तीनों पर…
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प्रवास की कड़वी अनुभूतियों के बीच नई नागरिकता की खोज में बेउर सिनेमा

अस्सी (1980) के दशक में फ्रांस में सिनेमा की एक नई धारा की शुरुआत नॉर्थ अफ्रीकन देशों से आए फ़िल्मकारों के द्वारा की गई। इन फ़िल्मकारों ने…
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आवाज की सीमाओं के बावजूद अहसास के बेमिसाल गायक थे मुकेश

27 अगस्त 1976 को डेट्रायट (अमेरिका) में हजारों की संख्या में लोग मुकेश और लता मंगेशकर के शो में उन्हें सुनने के लिए एकत्र हुए थे लेकिन…
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आखिर क्यों नहीं बनतीं गिरमिटिया पूर्वजों पर फ़िल्में

प्रवासी भारतीयों के सिनेमा पर एमफिल करते वक्त सन 2007-08 में ह्यूग टिंकर (HughTinker) की किताब में  गिरमिटिया मजदूरों के बारे में पढ़ने-जानने…
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रफ़ी को सुनते हुए आज भी ज़माना करवटें बदलता है

आज पार्श्वगायक मोहम्मद रफ़ी की 42वीं पुण्यतिथि है। आज भी हमारे दिलो-दिमाग से रफी गायब नहीं हुए अपितु ऐसा लगता है कि उनके चाहने वालों की…
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केरल से दुबई तक प्रवास और मलयालम सिनेमा

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा रेमीटेन्स प्राप्त करने वाला देश है। वैसे तो बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से बड़ी संख्या में प्रवासी खाड़ी…
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प्रवासी महिलाएं होम और होस्ट दोनों देशों में पितृसत्ता से आज़ादी चाहती हैं..

भारतीय उपमहाद्वीप और सम्पूर्ण दक्षिण-पूर्व एशिया के ज्यादातर समाज (खासी, गारो, नैयर, इजवाहा, बुंट एवं बिल्लावा जैसी मातृसत्तात्मक जनजातियों…
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औरत की जिंदगी के सिनेमाई संघर्ष में मुरब्बा खराब क्यों होता है?

कोरोना महामारी ने एक चीज यह तो कर ही दी है कि एकदम ताज़ा फ़िल्में हमारे घर तक पहुँच गई हैं, सिनेमा हॉल जाने की ज़हमत फ़िलहाल कोरोनाकाल तक के लिए…
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बॉलीवुड पर दक्षिण और दक्षिणपंथ का साया

साल 2013 में ही हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने अपने सौ साल पूरे कर लिए थे। यह एक लंबा और उतार  चढ़ाव भरा सफर रहा है। लेकिन आज इस मुकाम पर पहुंच कर…
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अमेरिकी भेदभाव और विद्वेष के खिलाफ़ चिकानो सिनेमा और ग्रेगरी नावा की फिल्में

हॉलीवुड दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित फिल्म उद्योग है लेकिन यह भी सच है कि वह भी कंटेन्ट और फॉर्म में ईमानदार नहीं रहा है। जिस तरह जर्मन सिनेमा…
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