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ज्ञान चंद बागड़ी

चल बुल्लेया चल ओथे चलिए जिथे सारे अन्ने

हद हद टपे सो औलिया बेहद टपे सो पीर। हद अनहद दोउ टपे सो वाको नाम फ़कीर।। जहां कहीं भी पीर और मुर्शिद का ज़िक़्र होगा, जहां मस्ती, खुमार,…
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