Friday, July 31, 2026
Friday, July 31, 2026




Basic Horizontal Scrolling



पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

ज्ञानचंद बागड़ी

जातिभेद और ऊंच-नीच के सख्त विरोधी कवि बुल्लेशाह

पंजाबी सूफ़ी आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इस आंदोलन का कोई भी सूफ़ी राज दरबार का आश्रित नहीं रहा। सारे पंजाबी सूफ़ी लोक कवि थे और जनमानस की समस्याओं, उनकी खुशियों और मान्यताओं का उन्हीं भली-भांति ज्ञान  था।  यह पूरा सूफ़ी साहित्य न सिर्फ आध्यात्मिक विकास का एक आईना है बल्कि समाज और समाज में हो रहे परिवर्तन का भी साक्षी है। बुल्लेशाह कि कविता में कट्टरपंथ और शाही रौब-दाब को लेकर हिकारत एक हद तक उनके इस धार्मिक पंथ से भी प्रभावित है। कवि की अपनी निजी चेतना तो होती ही है।
Bollywood Lifestyle and Entertainment