Wednesday, May 22, 2024

उत्तर प्रदेश: सवाल करनेवाले पत्रकारों पर सत्ता और सत्ता पोषित गुंडों के बढ़ते हमले

विगत वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश में पत्रकारों के उत्पीड़न और जानलेवा हमलों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। योगी आदित्यनाथ की सरकार के पहले कार्यकाल में राज्य में पत्रकारों के उत्पीड़न के 138 मामले दर्ज़ किए गए। दूसरे कार्यकाल में भी इसमें कमी नहीं आई है। विगत दिनों एक रैली की कवरेज के लिए गए पत्रकार पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने जानलेवा हमला किया और जौनपुर में सरे-बाज़ार एक पत्रकार को गोली मार दी गई।

बिहार : लड़कियों को स्कूल जाने और शिक्षित होने के मौके आज भी कम हैं

देश में जेंडर विभेद आज भी हो रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में देखा जाय तो लड़कियों को पढ़ाने के बदले घर की जिम्मेदारियों को उठाने कहा जाता है। विशेषकर आर्थिक रूप से असक्षम परिवारों में देखने को मिलता है। अगर बिहार की बात करें तो 2011 की जनगणना के अनुसार देश में महिला साक्षरता का राष्ट्रीय औसत जहां करीब 65 प्रतिशत रहा, वहीं बिहार में महिला साक्षरता की दर मात्र 50.15 प्रतिशत दर्ज किया गया है। जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।

मिर्ज़ापुर लोकसभा : निषादों का कहना है कि वे भूमिहीन हैं लेकिन ग्रामसभा की ज़मीन का पट्टा काश्तकारों को दिया गया

जब भी हम किसी गाँव में चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट के लिए जाते हैं तो कुछ लोग राममन्दिर, देश की सुरक्षा और धारा 370 की बात करते हैं। ऐसे लोगों की बात से दूसरे लोग भी भ्रमित और प्रभावित होते हैं। कुछ देर बात करने के बाद ही लोगों की वास्तविक समस्याएँ सामने आती हैं। मिर्ज़ापुर जिले के सिंधोरा गाँव के लोगों में भी आर्थिक स्तर पर कई धड़े हैं जिनकी अपनी ऐसी समस्याएँ हैं कि उनका हल दूर-दूर तक निकलता नहीं दिखता। अब देखना यह है कि जिंदगी की बुनियादी चुनौतियों से जूझ रहे लोग  लोकसभा चुनाव में बदलाव लाना चाहेंगे या पुराने प्रतिनिधि पर ही भरोसा कायम करेंगे।

बिहार : गया जिले का उचला गाँव स्वच्छ और खुले में शौच मुक्त की ओर अग्रसर

स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत हुई थी तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि इसका इतना व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। उचला गाँव के हर घर में लगभग शौचालय बन गया है। गाँव की सफाई के लिए सुपरवाइज़र और एक सफाई कर्मचारी की नियुक्ति भी की गई है। स्वच्छ भारत मुहिम के चलते ही उचला गाँव आज स्वच्छ और खुले में शौच मुक्त की ओर अग्रसर है।

ग्राउंड रिपोर्ट

देश

राज्य

तेलंगाना : परीक्षा में असफल होने से पिछले 48 घंटों में सात छात्रों ने की आत्महत्या

जैसे ही हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणाम घोषित होते हैं, उसके बाद देश के हर हिस्से से छात्रों के आत्महत्या करने जैसे मामले बढ़ जाते हैं। स्कूल और माता-पिता का एक परोक्ष-अपरोक्ष दबाव इसका कारण हो सकता है।

वाराणसी : छात्रा के साथ गैंगरेप मामले में विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों को बीएचयू प्रशासन ने भेजा नोटिस

बीते वर्ष 1 नवंबर की रात को बीएचयू में आईआईटी की एक छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया था। इस घटना में 3 युवकों की संलिप्तता पाई गई थी। ये तीनों ही दुष्कर्मी- कुणाल पांडेय, सक्षम पटेल और अभिषेक चौहान भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए थे।

बैलेट पेपर नहीं मिला तो मतदान नहीं करेंगे, लखनऊ के मतदाताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखा पत्र

आज 23 अप्रैल को लखनऊ के 9 मतदाताओं ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर उनका मतदान बैलेट पेपर के माध्यम से कराने की मांग की है। ये सभी 9 मतदाता लखनऊ पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से हैं।

उत्तर प्रदेश : मैनपुरी में ट्रैक्टर-ट्रॉली को ट्रक ने टक्कर मारी, चार महिलाओं की मौत

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के बिछवां थानाक्षेत्र के फर्दपुर गांव के पास शनिवार तड़के एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को ट्रक ने टक्कर मार दी, जिससे चार महिलाओं की मौत हो गई और 20 लोग घायल हो गए।

आजमगढ़ : लोकसभा चुनावों के लिए किसान संगठन जारी करेंगे किसान एजेंडा, भूमि अधिग्रहण के सवाल पर मांगेंगे जवाब

आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर किसानों के सवाल का जवाब हर प्रत्याशी को देना होगा। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के किनारे इंडस्ट्रियल कॉरीडोर या पार्क के नाम पर किसान एक इंच जमीन नहीं देंगे।

रोज़मर्रा का संघर्ष करता गोंडा का बेहना समाज

बेहना जाति पसमांदा मुसलमानों में गिनी जाती है और पारंपरिक रूप से रुई धुनने का काम करती रही है लेकिन अब कोई भी यह काम नहीं करता। मशीनें आ जाने से उनको काम मिलना धीरे-धीरे बंद होता गया। जाड़ा शुरू होते ही अपनी धुनकी कंधे पर लिए वे दूर-दराज के इलाकों में निकल जाते और बसंत आते-आते अच्छी-ख़ासी कमाई करके वे वापस आते। बाकी के दिनों में मेहनत-मजदूरी के दूसरे काम भी करते। लेकिन बनी-बनाई रजाइयाँ आने और मशीनों की बढ़ती संख्या ने उन्हें खदेड़ दिया।

तीस हज़ार की आबादी वाला गाँव जहां शहादत की गाथाएँ हैं लेकिन लड़कियों का एक भी स्कूल नहीं

तीस हज़ार की आबादी वाला देवरिया जिले का पैना गाँव, जहां शहादत की गाथाएँ तो बहुत हैं लेकिन लड़कियों को पढ़नें के लिए एक भी स्कूल नहीं है। यही नहीं इस गाँव में ठाकुरों का ऐसा आतंक रहा है कि कोई दुकानदार वहाँ दुकान करने की हिम्मत आज तक नहीं कर सका है।

गाजीपुर : पानी की टंकी का कागज नहीं मिलने पर मेदनीपुर में पानी की सप्लाई की ज़िम्मेदारी नहीं लेते यहाँ के प्रधान

केंद्र सरकार का सबको घर तक पानी पहुँचने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। ग्रामीण पानी के लिए परेशान हैं। टंकी है तो पानी नहीं, पानी है तो पाइप से सप्लाई नहीं। गर्मी के दिन आ गए पाने के अभाव में हर व्यक्ति परेशान है।

डेढ़गावाँ गाजीपुर : लाखों की लागत से बने शौचालय पर तीन साल से ताला और अस्पताल से अनुपस्थित डॉक्टर

सरकार के लाख दावे के बावजूद जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचारअपने चरम पर है। गाँवों में शौचालय, पेयजल, अस्पताल और प्रधानमंत्री आवासों के वितरण में घोर अनियामिततायें देखी जा रही हैं. गाजीपुर के दक्षिणी छोर पर स्थित डेढ़गाँवां गाँव में इसकी एक बानगी देखी जा सकती है। यहाँ के सार्वजनिक शौचालय में तीन साल से ताला लटक रहा है और अस्पताल परिसर में घास और गंदगी फैली हुई है। ग्रामवासियों का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टर कभी नहीं आते। डेढ़गाँवां के हालात पर यह ग्राउंड रिपोर्ट।

किशनगंज – ‘सिल्की’ सपना टूट गया, बची सिर्फ रेशमी यादें

पूरे देश में खेती करने वाले किसानों का खस्ताहाल है। सरकारी सुविधा से न तो उन्हें बीज उपलब्ध हो पाता है न खाद और न ही बाजार। ऐसे में किसान उत्पादित फसल को औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हो जाता है या फिर अपना पुश्तैनी काम छोडकर किसी दूसरे काम को करते हुए बामुश्किल अपनी जीविका चला पाता है। बिहार के किशनगंज से रेशम की खेती करने वाले किसानों की जमीनी हकीकत की पड़ताल करती यह रिपोर्ट

मृतक किसानों के कंकाल के साथ किसानों ने जंतर-मंतर पर किया प्रदर्शन, मांगे पूरी न होने पर वाराणसी में पीएम मोदी के खिलाफ लड़ेंगे...

किसानों ने कहा कि पीएम ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, पीएम मोदी ने नदियों को जोड़ने और जल संकट से निजात दिलाने का वादा किया था लेकिन कोई वादा पूरा नहीं हुआ।

Lok Sabha Election : हिंसा से प्रभावित रहे मणिपुर के 11 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान जारी

मणिपुर के 11 मतदान केन्द्रों पर पुनर्मतदान जारी है। 19 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान हिंसा, ईवीएम के साथ तोड़फोड़ की घटनाओं के कारण चुनाव आयोग ने 11 मतदान केन्द्रों पर पुनर्मतदान का निर्णय लिया था।

उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद की 10वीं और 12वीं कक्षाओं के परीक्षा परिणाम घोषित, बेटियों ने फिर लहराया परचम

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित 10वीं और 12वीं की वार्षिक परीक्षा में बेटियों ने दिखा दिया कि वे किसी से कम नहीं, जरूरत उन्हें मौका देने की है।

Lok Sabha Election : लोकतांत्रिक आवाजों का दमन कर रही केंद्र की मोदी सरकार, केरल में बोलीं प्रियंका गांधी

सरकार उन लोगों को परेशान करती है, उन पर आरोप लगाती है और उन्हें जेल में डाल देती है, जो उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत करते हैं।

Lok Sabha Election : यदि बीजेपी की सीटें बढ़ रही हैं तो उसके सहयोगी दलों की सीटें घट क्यों रही हैं?

वर्ष 2019 में बीजेपी के 303 सांसद लोकसभा में पहुंचे थे। अबकी बार 70 सीट अधिक लाने की बात कर रहे हैं, याने बीजेपी की कुल सीटें 370 होंगी। इस बार बीजेपी गठबंधन के साथ 400 पार की बात कर रही है। पिछले चुनाव में गठबंधन की 50 सीटें थीं लेकिन इस बार जो गणित बीजेपी ने तय किया, उसमें 30 सीटों पर आने की संभावना है। पढ़िए महेंद्र यादव का चुनाव पर विश्लेषणात्मक लेख

Lok Sabha Election : पहले चरण में ही पश्चिम की हवा ने भाजपा का सफाया कर दिया है, नोएडा में बोले अखिलेश यादव

भाजपा नीत सरकार पर हमला बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि नौजवानों के लिए सेना की पक्की नौकरी को अग्निवीर में बदल दिया गया और (सेना की) नौकरी आधी अधूरी कर दी गई। किसानों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा, ' समाजवादी पार्टी किसानों की मुआवजे की समस्या को खत्म करेगी और किसानों की जमीनों का सही मुआवजा देगी।'

Lok Sabha Election : कड़ी सुरक्षा के बीच बस्तर में शाम पाँच बजे तक हुआ 63.41% मतदान, CRPF के एक जवान की मौत

बस्तर लोकसभा क्षेत्र के लिए इस बार भाजपा ने नए चेहरे महेश कश्यप को मैदान में उतारा है। कश्यप पूर्व में विश्व हिंदू परिषद के सदस्य रह चुके हैं। वहीं कांग्रेस ने अपने मौजूदा सांसद दीपक बैज, जो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं का टिकट काटकर कोंटा क्षेत्र के विधायक कवासी लखमा को मैदान में उतारा है।

Lok Sabha Election : उत्तराखंड में 5 बजे तक 53.65 फीसदी मतदान, राज्य के कई जिलों में ग्रामीणों ने किया चुनाव बहिष्कार

उत्तराखंड के पर्वतीय ग्रामीण इलाकों के लोग पेयजल, सड़कों, स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं के गांवों में न पहुँचने से नाराज हैं।

Lok Sabha Election : यूपी की आठ सीटों पर औसतन 57.90 प्रतिशत मतदान, पीलीभीत में ग्रामीणों ने किया चुनाव बहिष्कार

पीलीभीत जिले के कुछ ग्रामीण इलाकों में लोगों ने सरकार-प्रशासन  द्वारा की गई उपेक्षा और नागरिक सुविधाओं की कमी के विरोध में चुनाव का बहिष्कार किया है।

Lok Sabha Election : मतदान से पहले पूर्वी नागालैंड में ईएनपीओ ने अनिश्चितकालीन बंद कर चुनाव का बहिष्कार किया

जहां लोकसभा चुनाव के पहले चरण में नागालँड की एकमात्र सीट पर पर मत डाले जाने है, वहीं पूर्वी नागालँड ईएनपीओ ने अलग राज्य की अपनी मांग को लेकर अनिश्चितकालीन बंद की घोषणा की है।

धार्मिक सेक्टर में अवसरों का पुनर्वितरण बने चुनावी मुद्दा

आज हमारे देश के मंदिरों में अकूत संपत्ति पड़ी हुई। इस संपत्ति का भोग एक खास वर्ग ब्राम्हण ही कर रहा है। यदि धार्मिक सेक्टर में जितनी आबादी-उतना हक का सिद्धांत लागू हो जाता है तो मंदिरों के ट्रस्टी बोर्ड से लेकर पुजारियों की नियुक्ति में अब्राह्मणों का वर्चस्व हो जाएगा और वे मठों–मंदिरों की बेहिसाब संपदा के भोग का अवसर भी पा जाएंगे और आर्थिक रूप से मजबूत भी होंगे।

आरएसएस प्रमुख और भाजपा, आरक्षण समीक्षा की आड़ में पिछड़ों को उचित प्रतिनिधित्व से दूर रखने की मंशा रखते हैं

कुछ समय पहले तक आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ओबीसी आरक्षण के सख्त खिलाफ थे और आरक्षण को लेकर लगातार विरोध में बयान दिया करते थे लेकिन चुनाव आते ही उनके सुर बदल गए क्योंकि देश में ओबीसी का बड़ा वोट बैंक हैं।

अग्निवीर योजना : दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक युवाओं के खिलाफ भाजपा-आरएसएस की बड़ी साजिश

अग्निवीर योजना की शुरुआत एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है। भारतीय सेना में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक युवाओं को शामिल होने से रोकने के लिए एक गहरा इकोसिस्टम तैयार किया गया है। नरेंद्र मोदी और आरएसएस द्वारा तैयार की गई इस रणनीति को समझना एक सामान्य भारतीय नागरिक के लिए आसान नहीं है।

 नफरत की राजनीति की हदें पार करती भाजपा क्या चार सौ पार पहुँचेगी या गर्त में जाएगी?

चुनावों में जब भी भाजपा के समक्ष संकट आता है तो वह सांप्रदायिकता की पनाह में चली जाती है। चूंकि कोई भी चुनाव आसान नहीं होता, इसलिए भाजपा मण्डल के उत्तरकाल के हर चुनाव में राम नाम जपने और मुस्लिम विद्वेष के प्रसार के लिए बाध्य रही।

Salempur Loksabha : किसान राममन्दिर को नहीं MSP और किफ़ायती मूल्य पर खाद-बिजली-पानी को मान रहे हैं सरकार की उपलब्धि, जो है ही नहीं

चुनावी दौर में पूर्वाञ्चल के गांवों के किसान अपनी समस्याओं को लेकर खदबदा रहे हैं और पिछले दस वर्षों से सत्ता पर काबिज भाजपा सरकार के खिलाफ गुस्से से भरे हैं। विगत वर्षों में किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर देशव्यापी आंदोलन चलाया लेकिन सरकार से कोई ठोस आश्वासन मिलने की बजाय उनका दमन ही किया गया। इन बातों से किसानों के भीतर एक आक्रोश जमा हुआ है और उन्होंने सत्ता परिवर्तन का मन बना लिया है।

Loksabha मिर्ज़ापुर : सरकार की नीतियों के चलते व्यापारी समाज नाराज, चुनाव में उलटफेर की संभावना

चुनाव के इस माहौल में मिर्ज़ापुरवासियों के मन में गहरी ऊहापोह चल रही है। पिछले दो बार से इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करनेवाली अनुप्रिया पटेल दो बार केंद्र में मंत्री रही हैं लेकिन व्यवसायियों का कहना है कि उन्होंने उनके हित में कुछ नहीं किया। फिलहाल वे ऐसे प्रतिनिधि को जिताने के बारे में सोच रहे हैं जो उनके शहर को नई रौनक से भर दे।

 भारत में समतामूलक समाज निर्माण की उम्मीद जगाता कांग्रेस का घोषणापत्र 

सदियों से शक्ति के समस्त स्रोतों पर सवर्णों का अधिकार रहा है। देखा जाय तो भेदभाव और अवसरों की कमी झेलने वाली 70 प्रतिशत आबादी को असमानताताओं के दल-दल से निकालने के जरूरत है। कांग्रेस का घोषणा पत्र इस दिशा में उम्मीद की एक किरण बना हुआ है।

Lok Sabha Election : महिलाओं को दिए गए टिकट की संख्या पर राजनैतिक दलों की मंशा को लेकर सवाल उठना जरूरी

वर्ष 2023 में संसद में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू हुआ, जिसमें उन्हें 33 प्रतिशत आरक्षण देने का नियम बना। महिलाओं ने जश्न मनाया और सभी दलों ने इसका स्वागत किया लेकिन जमीनी हकीकत देखें तो किसी भी राष्ट्रीय या बड़े क्षेत्रीय दलों ने इस अधिनियम के आधार पर टिकट का बंटवारा नहीं किया। देश के सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में इसका आकलन कर इस बात की वास्तविकता देख आने वाले दिनों में राजनैतिक दलों की भूमिका पर सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है

भाजपा-आरएसएस की राजनीति हमेशा से ही दलित,पिछड़ा,अल्पसंख्यक विरोधी रही है

भाजपा और आरएसएस हमेशा से दलित,ओबीसी विरोधी रहे हैं। देश के संविधान को बदलने के लिए इस चुनाव में 400 पार का नारा दिया लेकिन संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने को लेकर जनता की तरफ से आ रहे विरोध को देखते हुए इन्होंने चुनाव का नेरेटिव बदल इनके शुभचिंतक होने की बात बार-बार दोहरा रहे हैं।

बिहार : महंगे सिलेंडर के कारण गाँव में फिर से लौट रहा है मिट्टी के चूल्हे का दौर, फ्लॉप हुई उज्ज्वला योजना

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत 1 मई 2016 को की गई थी जिसका मकसद जीवाश्म ईंधन की जगह एलपीजी गैस को बढ़ावा देना, महिला सशक्तीकरण के साथ ही उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा करना आदि भी रहा है, लेकिन आज यह योजना महंगी गैस के चलते फ्लॉप होती जा रही है। बिहार के मुज़फ्फ़रपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड के कई गाँवों में महिलाओं ने कहा कि महंगी गैस के चलते वे चूल्हे पर खाना बनाने लगी हैं।

राजस्थान : स्वरोजगार से बदल रही है महिलाओं की आर्थिक स्थिति

गैर सरकारी संस्था उरमूल द्वारा उपलब्ध कराये गये काम की बदौलत राजस्थान के लूणकरणसर इलाके की ग्रामीण महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं बल्कि परिवार की आर्थिक तंगी को भी दूर कर रही हैं।

महंगाई की मार : प्याज-टमाटर और आलू के बढ़े दाम, वेज थाली हुई 7 फीसदी महंगी

आवक कम होने और कम आधार दर के कारण प्याज का दाम सालाना आधार पर 40 प्रतिशत, टमाटर का दाम 36 प्रतिशत और आलू का दाम 22 प्रतिशत बढ़ने से शाकाहारी थाली महंगी हो गई है।

रासायनिक खेती के उदय और विकास में वैश्विक शक्तियों की भूमिका और लाभ की राजनीति

रासायनिक कंपनियों द्वारा उत्पादित रासायनिक खादों, दवाओं और आनुवंशिक रूप से संशोधित बीजों को कृषि में प्रयोग करने के इतिहास की गहराई से छानबीन करने से पता चल सकता है कि दुनिया भर की सरकारों ने जानबूझकर सोची समझी रणनीति के तहत रासायनिक कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से इसकी अनुमति दिया और अपनी कृषि नीतियों में बदलाव किया।

लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार की मनरेगा मजदूरी में आंशिक बढ़ोतरी पर विपक्षी नेताओं ने कसा तंज

जहां एक तरफ चुनाव से पहले मनरेगा मजदूरी में आंशिक बढोरती कर सरकार वाहवाही लूट रही है, वहीं इस बार वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार मनरेगा के मद में लगभग 34 फीसदी की कटौती कर चुकी है।

राजस्थान के अलवर जिले के शादीपुर गांव में नहीं है कोई माध्यमिक स्कूल, प्रभावित हो रही बालिका शिक्षा

केंद्र सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद बालिका शिक्षा की मुहीम को राजस्थान के अलवर जिले के शादीपुर गाँव में झटका लगता हुआ दिखाई दे रहा है, जहाँ लड़कियों की पढाई के लिए 12वीं तक का स्कूल ही नहीं है।

कोटा : नहीं थम रहा आत्महत्याओं का सिलसिला, एक और विद्यार्थी ने की आत्महत्या

कोटा को कोचिंग हब माना जाता है। पूरे देश से डॉक्टर और इंजीनियरिंग में प्रवेश लेने के लिए छात्र यहाँ आते हैं। पढ़ाई के दबाव के चलते लगातार आत्महत्या की खबरें आती रहतीं हैं। इस वर्ष चार महीनों में 9 छात्रों ने आत्महत्या की।

Lok Sabha Election : शिक्षा और उससे जुड़े मुद्दे क्यों नहीं बन रहे हैं जरूरी सवाल?

पिछले दस वर्षों में शिक्षा का स्तर जितना गिरा है उतना पहले कभी नही। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक सभी संस्थानों में विज्ञान और तर्क को दरकिनार कर धर्म को केंद्र में रखा गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में शिक्षा जैसा महत्त्वपूर्ण मुद्दा जनता की नजर में क्यों नहीं है?

राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित परीक्षा में भदोही के 183 बच्चों ने सफलता पाई लेकिन खाली रह गईं एसटी की सभी सीटें

छात्रवृत्ति निर्धन बच्चों के आगे की पढ़ाई के लिए बहुत बड़ा आधार होती है। राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में सफलता पाकर बहुत से बच्चों ने अपनी मंज़िलें पाई है। विगत वर्षों की तरह इस बार भी भदोही जिले के 183 बच्चों ने सफलता पाई है। हालांकि अनुसूचित जनजाति के कोटे की चार सीटें खाली ही रह गईं।

पूर्वांचल विश्‍वविद्यालय : कॉपी में ‘जय श्री राम’ लिखकर फार्मेसी की परीक्षा में चार छात्र उत्‍तीर्ण, दो शिक्षक दोषी

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के फार्मेसी प्रथम वर्ष के चार छात्र अपनी परीक्षा की कॉपियों में केवल ‘जय श्री राम’ लिखकर पास हो जाते है। यह हमारी शिक्षा व्यवस्था और सरकारी दावे की असलियत की पोल खोलती एक छोटी सी नजीर भर है।

कुपोषण से निज़ात पाये बिना विकसित भारत का दावा कैसे किया जा सकता है

प्रश्न उठता है कि क्या वास्तव में भारत के बच्चे, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे, कुपोषण मुक्त और स्वस्थ हैं? हालांकि सरकारों की ओर जारी आंकड़ों में कुपोषण के विरुद्ध जबरदस्त जंग दर्शाई जातीहै, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि अभी भी हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाएं और 5 पांच तक की उम्र के अधिकतर बच्चे कुपोषण मुक्त नहीं हुए हैं।

आयुष्मान भारत योजना : वाराणसी मंडल का 15 करोड़ का भुगतान रद्द

आज सरकार रेवडियों की तरह आयुष्मान कार्ड तो बना रही है लेकिन सालाना स्वस्थ्य का बजट नहीं बढ़ा रही है। ऐसे में सरकार की गरीब लोगों को अच्छी और मुफ्त स्वास्थ्य योजना का लाभ देने की मंशा पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।

तेजी से बढ़ रहे स्तन कैंसर के मामले, 2040 तक प्रतिवर्ष 10 लाख मौतों की आशंका : लैंसेट रिपोर्ट

ICMR की रिसर्च के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की तुलना में शहरी क्षेत्र की महिलाओं में स्तन कैंसर होने की संभावना अधिक होती है।

महिलाएं मासिक धर्म के समय सैनिटरी पैड के उपयोग में सतर्कता रखें

माहवारी कोई बीमारी नहीं है यह तो प्राकृतिक प्रक्रिया है । इस समय उपयोग में आने पैड,कॉटन या सैनिटरी का उपयोग सावधानी से करें जो हर स्थिति में सुरक्षित हों।

कैंसर से बचने के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी

विशेषज्ञों का यह मानना है कि कैंसर के सभी रूपों का इलाज संभव है। लेकिन इसके लिए लोगों को स्वयं जागरूक होने की जरूरत है। उन्हें अपने शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव को नज़रंदाज़ नहीं करनी चाहिए। समय-समय पर चेकअप इस बीमारी को गंभीर होने से पहले समाप्त कर सकता है। वहीं व्यायाम, पौष्टिक भोजन और तंबाकू उत्पादों के सेवन से परहेज इसके खतरे को कम करने में मददगार साबित होता है।

विद्रोही का आक्रोश छाती पीटने वाला आक्रोश नहीं है

वह मोहनजोदड़ो की आखिरी सीढ़ी से शीर्षक कविता के माध्यम से स्त्री-अस्मिता के सवालों से साहस के साथ टकराते हैं। वह दिखलाते हैं कि जिन साम्राज्यवादी सभ्यताओं पर हम गर्व करते हैं वह स्त्रियों और आम इंसानों की लाशों पर खड़ी हुई हैं। वह एक तरह से दुनिया की सारी सभ्यताओं को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल उठाते हैं कि आखिर क्या बात है कि हर सभ्यता के मुहाने पर औरत की जली हुई लाश और इंसानों की बिखरी हुई हड्डियाँ मिलती हैं। यह अमानवीयता केवल मोहनजोदड़ों तक सीमित नहीं है; यह बेबीलोनिया से लेकर मेसोपोटामिया तक, सीथिया की चट्टानों से लेकर सवाना के जंगलों तक फैली हुई है।

अभिनेता ही नहीं सामाजिक आंदोलनकारी भी थे नीलू फुले

नीलू फुले के पूर्वजों में महामना जोतीराव फुले और माता सावित्रीबाई फुले सबसे उल्लेखनीय हैं लेकिन वास्तव में नीलू फुले परिवार के उस हिस्से से ताल्लुक रखते थे जिसने आजीवन जोतीराव फुले का विरोध किया। वे सिनेमा में काम जरूर करते थे लेकिन उनका दिल समाज के लिए धड़कता था। वे आजीवन राष्ट्रसेवा दल के साथ रहे लेकिन बाद के दिनों में कुछ उपेक्षित महसूस करने लगे थे। मैं जब भी उनसे मिला या बात करता उनमें वही जज़्बा और जोश होता जो जवानी के दिनों में होता था। वे हर व्यक्ति के मददगार मित्र थे।

श्रद्धांजलि : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा में याद किए गए प्रो. चौथीराम यादव

हिन्दी आलोचना को एक नयी धारा 'अम्बेडकरवादी-मार्क्सवादी' प्रो चौथीराम यादव की ही बदौलत मिली। वे आलोचना को नए ढंग से प्रस्तुत करते थे। वे आलोचना को सिर्फ साहित्य से ही नहीं, बल्कि समाज से जोड़कर देखते थे। काशी हमेशा कबीर के बाद प्रो चौथीराम यादव को याद करेगी।

प्रोफेसर चौथीराम यादव : वंचितों के व्याख्याता का महाप्रयाण

हिन्दी के शीर्षस्थ आलोचक और धुरंधर वक्ता प्रोफेसर चौथीराम यादव का महाप्रयाण बहुजन आंदोलन और साहित्य के लिए बहुत बड़ी क्षति है। वह अपने दौर के शानदार अध्यापकों में रहे हैं जिनकी याद उनके विद्यार्थियों को आज भी रोमांचित करती है। उन्होंने बड़े पैमाने पर लोगों के दृष्टिकोण को उन्नत किया जिससे आज हज़ारों लोग साहित्य के इतिहास और लोकधर्मी प्रतिरोध की परंपरा को व्यापक बहुजन समाज की मुक्ति की कसौटी पर देख रहे हैं। छद्म बुद्धिजीवियों की बढ़ती कतार के बरक्स प्रोफेसर चौथीराम यादव की उपस्थिति हमेशा एक जन-बुद्धिजीवी की उपस्थिति की आश्वस्ति देती रही है।

मिर्ज़ापुर : शायर की क़ब्र पर उगी घास और समय की मांग से बाहर होती जा रही मिर्ज़ापुरी कजरी

उत्तर प्रदेश के लोकगायन में बहुत चर्चित विधा है कजरी। कजरी की बात होने पर मिर्ज़ापुरी कजरी और लोककवि बप्फ़त का नाम आना सहज है। दोनों एक दूसरे के पर्याय हैं। आज भले ही कजरी गायन की रौनक कम हो रही है लेकिन कजरी लेखक बफ़्फ़्त की लिखी कजरी आज भी गाई और सुनी जाती हैं। बेशक उनकी कब्र वीरान पड़ी है, उन्हें याद करने वाले कम हो गए हों लेकिन जब-जब कजरी की बात होगी बप्फ़त की याद जरूर आएगी।

कांग्रेस के घोषणापत्र पर सिर्फ आंबेडकरवाद की छाप है

कांग्रेस का घोषणा पत्र पूरी तरह से आंबेडकरवाद से प्रभावित है। इस घोषणा पत्र में दलित, आदिवासी,पिछड़ों के उत्थान के मार्ग को प्रशस्त करने का खाका खीचा गया है। इसी कड़ी में विविधता आयोग की स्थापना करने का वादा कर कांग्रेस ने आंबेडकरवाद को सम्मान देने का ऐतिहासिक कार्य भी किया है।

Lok Sabha Election : संविधान और आरक्षण की रक्षा बन गया है सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा, राहुल गांधी के साथ एकजुट हो रहा बहुजन...

कुछ भाजपा नेताओं द्वारा 400 पार के पीछे संविधान बदलने की मंशा जाहिर किए जाने के बाद संविधान और आरक्षण बचाना चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है, जिस कारण आरक्षित वर्ग गर्मी की परवाह किए बिना वोट देने के लिए निकल रहा है।

गैर कांग्रेसवाद के गर्भ से निकली सांप्रदायिक सरकार के मुखिया की हताशा क्या कहती है?

सन 1950 से 1977 अर्थात 27 सालों में जनसंघ को सिर्फ छह प्रतिशत मतदाताओं ने पसंद किया था लेकिन 1963 के बाद डॉ. राम मनोहर लोहिया के गैर कांग्रेसी राजनीतिक कदम के चलते शिवसेना से लेकर मुस्लिम लीग और जनसंघ जैसे घोर सांप्रदायिक दलों के साथ गठजोड़ की वजह से जनसंघ को बहुत लाभ हुआ। इस लेख में जाने-माने लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ सुरेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक विरासत के बहाने उनकी हताशा पर बात कर रहे हैं।

क्या मोदीजी कांग्रेस के न्याय पत्र से डर गए हैं?

विगत कई जनसभाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के घोषणापत्र के खिलाफ तथ्यहीन बातें की हैं क्या वह उनकी संभावित हार और अपने विकास कार्यों के प्रति जनता के अविश्वास का नतीजा है। आखिर वह क्यों इतनी अनर्गल और सांप्रदायिक बातें कर रहे हैं?

धन-दौलत के पुनर्वितरण की घोषणा और मोदी की तिलमिलाहट का राज

पहले चरण के चुनाव के बाद से बीजेपी को हार का डर सताने लगा है। इसीलिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुलकर हिन्दू -मुस्लिम की बातें कर रहे हैं। हद तो तब हो गयी जब राजस्थान के बांसवाड़ा के चुनावी सभा में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘कांग्रेस का घोषणापत्र माओवादी सोच को धरती पर उतारने की है।