Monday, May 27, 2024
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राजस्थान : उदयपुर में अव्यवस्थित सड़कें बनी जी का जंजाल, रोड किनारे नाली न बनने से सडकों पर बह रहा सीवर का पानी

कहीं भी सड़क बनाने से पहले कुछ मानकों का पालन करना चाहिए। लेकिन राजस्थान के उदयपुर शहर के मनोहरपुरा गाँव में कई बातों को नजरंदाज कर दिया गया।जैसे सड़क के किनारे नाली न होने के बावजूद सड़कें बना दी गईं। इसका परिणाम यह हुआ कि नालों का पानी सडकों पर बजबजा रहा है और लोगों को आने जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

वाराणसी : एक ऐसा गाँव जहाँ एक अंग्रेज़ को लोग बाबा की तरह पूजते हैं

अपनी सांस्कृतिक विशेषताओं के साथ ही घोड़हा के लोगों ने शिक्षा के महत्व को समझा है। अब लगभग हर घर के बच्चे स्कूल जाते हैं। लड़के-लड़की में पहले की तरह भेदभाव करने की परंपरा कमजोर पड़ती गई है। अब लड़के ही केवल दुलरुआ नहीं हैं, बल्कि लड़कियां भी दुलारी हैं।

बोलिविया गाँवों और देहातों का देश है

वैलेग्राण्डे व ला-हिग्वारा को चे से संबंधों की सज़ा मिली है। न कोई विकास का काम, न सड़कों का आधुनिकीकरण। लेकिन 27000 की आबादी वाला वैलेग्राण्डे एक खूबसूरत कस्बा है। यहां लोग एक दूसरे को जानते हैं, बाजारों में भारत के गाँवों जैसी रौनक होती है। शहर के मध्य स्थित सेन्ट्रल प्लाजा में में खूबसूरत पार्क है, जहां शाम के वक्त लोगों की भीड़ होती है। युवाओं में रात में घूमने का शौक है। बच्चे सड़कों पर खेलते हैं, ट्रैफिक कम है। शाम के समय परिवारों के लोग अपने दरवाजे पर बाहर बैठते हैं, गप्पे लगाते हैं। पढ़िये विद्याभूषण रावत का आत्मीय यात्रा वृत्तान्त।

चिपको आंदोलन का केंद्र रहा रेणी गाँव अब राजनीति और कॉर्पोरेट के गिद्धों का शिकार है

रेणी गाँव के लोग निराश हैं।  गाँव में गौरा देवी की आदमकद प्रतिमा थी जो अब वहाँ से हटा दी गयी है। नेताओं को इसका कोई दर्द नहीं कि एक आदिवासी महिला, जिसने हमारे देश को दुनिया के पर्यावरणवादियों की नज़र में ऊंचा स्थान दिलवाया उसका गाँव ख़त्म होने वाला है।  वह जगह हमारे नक़्शे से गायब हो सकती है जहाँ से दुनिया को चिपको का सन्देश मिला।

राजस्थान : उदयपुर में अव्यवस्थित सड़कें बनी जी का जंजाल, रोड किनारे नाली न बनने से सडकों पर बह रहा सीवर का पानी

कहीं भी सड़क बनाने से पहले कुछ मानकों का पालन करना चाहिए। लेकिन राजस्थान के उदयपुर शहर के मनोहरपुरा गाँव में कई बातों को नजरंदाज कर दिया गया।जैसे सड़क के किनारे नाली न होने के बावजूद सड़कें बना दी गईं। इसका परिणाम यह हुआ कि नालों का पानी सडकों पर बजबजा रहा है और लोगों को आने जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

वाराणसी : एक ऐसा गाँव जहाँ एक अंग्रेज़ को लोग बाबा की तरह पूजते हैं

अपनी सांस्कृतिक विशेषताओं के साथ ही घोड़हा के लोगों ने शिक्षा के महत्व को समझा है। अब लगभग हर घर के बच्चे स्कूल जाते हैं। लड़के-लड़की में पहले की तरह भेदभाव करने की परंपरा कमजोर पड़ती गई है। अब लड़के ही केवल दुलरुआ नहीं हैं, बल्कि लड़कियां भी दुलारी हैं।

बोलिविया गाँवों और देहातों का देश है

वैलेग्राण्डे व ला-हिग्वारा को चे से संबंधों की सज़ा मिली है। न कोई विकास का काम, न सड़कों का आधुनिकीकरण। लेकिन 27000 की आबादी वाला वैलेग्राण्डे एक खूबसूरत कस्बा है। यहां लोग एक दूसरे को जानते हैं, बाजारों में भारत के गाँवों जैसी रौनक होती है। शहर के मध्य स्थित सेन्ट्रल प्लाजा में में खूबसूरत पार्क है, जहां शाम के वक्त लोगों की भीड़ होती है। युवाओं में रात में घूमने का शौक है। बच्चे सड़कों पर खेलते हैं, ट्रैफिक कम है। शाम के समय परिवारों के लोग अपने दरवाजे पर बाहर बैठते हैं, गप्पे लगाते हैं। पढ़िये विद्याभूषण रावत का आत्मीय यात्रा वृत्तान्त।

चिपको आंदोलन का केंद्र रहा रेणी गाँव अब राजनीति और कॉर्पोरेट के गिद्धों का शिकार है

रेणी गाँव के लोग निराश हैं।  गाँव में गौरा देवी की आदमकद प्रतिमा थी जो अब वहाँ से हटा दी गयी है। नेताओं को इसका कोई दर्द नहीं कि एक आदिवासी महिला, जिसने हमारे देश को दुनिया के पर्यावरणवादियों की नज़र में ऊंचा स्थान दिलवाया उसका गाँव ख़त्म होने वाला है।  वह जगह हमारे नक़्शे से गायब हो सकती है जहाँ से दुनिया को चिपको का सन्देश मिला।