Friday, June 21, 2024
होमराष्ट्रीय

राष्ट्रीय

पिछड़ों को मुख्यधारा में शामिल करने की चुनौती और पेपरलीक के बढ़ते मामले

4 जून से पहले, चुनाव को लेकर जहां पूरे देश में अलग-अलग पार्टियों की राजनीति चर्चा केंद्र में थी, वहीं 4 जून को नीट के नतीजे आने बाद नीट पपेरलीक होने की चर्चा हो रही है। फिर 18 जून को नेट परीक्षा का पेपरलीक हो गया। परीक्षा एजेंसी ने दुबारा परीक्षा करवाने की बात जरूर कही है लेकिन क्या आने वाले दिनों में पेपरलीक नहीं होगा, इसका भरोसा युवा कैसे करें?

नीट की परीक्षा शुचिता पर उठे सवाल, छात्रों ने लगाया धांधली का गंभीर आरोप

छात्रों का कहना है कि गरीब माँ बाप अपना पेट काटकर अपने बच्चों की कापी किताब के साथ अन्य जरूरतों को पूरा करते रहते हैं इस उम्मीद के साथ कि एक दिन ऐसा आयेगा जब उनका बेटा डॉक्टर बनेगा और उनकी गरीबी दूर होगी, लेकिन उनके सपनों पर तब पानी फिर जाता है जब ये परीक्षाएं धांधली की भेंट चढ़ जाती हैं।

उच्चतम न्यायालय ने मतदान आंकड़े 48 घंटे के भीतर जारी करने की याचिका पर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा

उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से एक हफ्ते के अंदर जवाब मांगा, जिसमें लोकसभा चुनाव के प्रत्येक चरण का मतदान संपन्न होने के 48 घंटे के अंदर मतदान केंद्रवार मत प्रतिशत के आंकड़े आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

सर सुंदरलाल अस्पताल : अपने ही विभाग के खिलाफ आमरण अनशन पर क्यों बैठे हैं डॉ ओम शंकर

एक तरफ आज वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन से एक दिन पहले 6 किलोमीटर का रोड शो करेंगे और जनता को लुभाएंगे, वहीं दूसरी तरफ जनता की स्वास्थ्य सुविधा की मांग के लिए लगातार आवाज उठाने वाले बीएचयू में हृदय रोग विभाग के विभागाध्ययक्ष डॉ ओमशंकर का आमरण अनशन का तीसरा दिन है।

मजदूरों की आवाज के लिए बना ट्रेड यूनियन, आज फासीवाद के दौर में खुद संघर्ष कर रहा है

मार्क्स का नारा था - दुनिया के मजदूरों एक हो। इस नारे की सबसे बड़ी पूंजीवादी आलोचना यही है कि हमारे देश में मजदूर जब किसी एक संगठन के नीचे नहीं हैं, तो दुनिया के मजदूर कैसे एक होंगे? लेकिन मार्क्स के इस नारे का अर्थ मजदूरों के किसी एक संगठन के नीचे एकत्रित होने का नहीं है। इस नारे का वास्तविक अर्थ यही है कि दुनिया के स्तर पर साम्राज्यवाद के खिलाफ और अपने-अपने देशों के भीतर सरकारों की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष में मजदूर एकजुट हों। आज भारत अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय पूंजी की तानाशाही की जकड़ में है, कॉर्पोरेट और हिंदुत्व के गठबंधन ने देश की अस्मिता को दांव पर लगा दिया है, संवैधानिक संस्थाएं चरमरा रही है और एक फासीवादी तानाशाही का खतरा देश के दरवाजे पर खड़ा है।

पिछड़ों को मुख्यधारा में शामिल करने की चुनौती और पेपरलीक के बढ़ते मामले

4 जून से पहले, चुनाव को लेकर जहां पूरे देश में अलग-अलग पार्टियों की राजनीति चर्चा केंद्र में थी, वहीं 4 जून को नीट के नतीजे आने बाद नीट पपेरलीक होने की चर्चा हो रही है। फिर 18 जून को नेट परीक्षा का पेपरलीक हो गया। परीक्षा एजेंसी ने दुबारा परीक्षा करवाने की बात जरूर कही है लेकिन क्या आने वाले दिनों में पेपरलीक नहीं होगा, इसका भरोसा युवा कैसे करें?

नीट की परीक्षा शुचिता पर उठे सवाल, छात्रों ने लगाया धांधली का गंभीर आरोप

छात्रों का कहना है कि गरीब माँ बाप अपना पेट काटकर अपने बच्चों की कापी किताब के साथ अन्य जरूरतों को पूरा करते रहते हैं इस उम्मीद के साथ कि एक दिन ऐसा आयेगा जब उनका बेटा डॉक्टर बनेगा और उनकी गरीबी दूर होगी, लेकिन उनके सपनों पर तब पानी फिर जाता है जब ये परीक्षाएं धांधली की भेंट चढ़ जाती हैं।

उच्चतम न्यायालय ने मतदान आंकड़े 48 घंटे के भीतर जारी करने की याचिका पर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा

उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से एक हफ्ते के अंदर जवाब मांगा, जिसमें लोकसभा चुनाव के प्रत्येक चरण का मतदान संपन्न होने के 48 घंटे के अंदर मतदान केंद्रवार मत प्रतिशत के आंकड़े आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

सर सुंदरलाल अस्पताल : अपने ही विभाग के खिलाफ आमरण अनशन पर क्यों बैठे हैं डॉ ओम शंकर

एक तरफ आज वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन से एक दिन पहले 6 किलोमीटर का रोड शो करेंगे और जनता को लुभाएंगे, वहीं दूसरी तरफ जनता की स्वास्थ्य सुविधा की मांग के लिए लगातार आवाज उठाने वाले बीएचयू में हृदय रोग विभाग के विभागाध्ययक्ष डॉ ओमशंकर का आमरण अनशन का तीसरा दिन है।

मजदूरों की आवाज के लिए बना ट्रेड यूनियन, आज फासीवाद के दौर में खुद संघर्ष कर रहा है

मार्क्स का नारा था - दुनिया के मजदूरों एक हो। इस नारे की सबसे बड़ी पूंजीवादी आलोचना यही है कि हमारे देश में मजदूर जब किसी एक संगठन के नीचे नहीं हैं, तो दुनिया के मजदूर कैसे एक होंगे? लेकिन मार्क्स के इस नारे का अर्थ मजदूरों के किसी एक संगठन के नीचे एकत्रित होने का नहीं है। इस नारे का वास्तविक अर्थ यही है कि दुनिया के स्तर पर साम्राज्यवाद के खिलाफ और अपने-अपने देशों के भीतर सरकारों की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष में मजदूर एकजुट हों। आज भारत अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय पूंजी की तानाशाही की जकड़ में है, कॉर्पोरेट और हिंदुत्व के गठबंधन ने देश की अस्मिता को दांव पर लगा दिया है, संवैधानिक संस्थाएं चरमरा रही है और एक फासीवादी तानाशाही का खतरा देश के दरवाजे पर खड़ा है।

ईवीएम भरोसेमंद नहीं, मतपत्रों से ही हो चुनाव में – सोशलिस्ट पार्टी इंडिया

इस प्रदर्शन का उद्देश्य मात्र इतना है कि ई.वी.एम. के बारे में भारत का निर्वाचन आयोग जो दावे कर रहा है कि ई.वी.एम. में कोई गड़बडी नहीं हो सकती, हम उसको गलत साबित कर रहे हैं।