Sunday, June 23, 2024
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अर्थव्यवस्था

मजदूरों को काम देने में नाकाम होती जा रही हैं बनारस की श्रम मंडियाँ

एक समय था जब असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को मंडियों में आसानी से काम मिल जाया करता था लेकिन आज स्थिति यह हो गई है कि पूरे महीने भर में केवल 10-15 दिन ही लोगों को रोजगार मिल पा रहा है। यह स्थिति मजदूरों के अनुसार पिछले 8-10 वर्षों में जयादा तेजी के साथ आई है।

बिहार : महंगे सिलेंडर के कारण गाँव में फिर से लौट रहा है मिट्टी के चूल्हे का दौर, फ्लॉप हुई उज्ज्वला योजना

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत 1 मई 2016 को की गई थी जिसका मकसद जीवाश्म ईंधन की जगह एलपीजी गैस को बढ़ावा देना, महिला सशक्तीकरण के साथ ही उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा करना आदि भी रहा है, लेकिन आज यह योजना महंगी गैस के चलते फ्लॉप होती जा रही है। बिहार के मुज़फ्फ़रपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड के कई गाँवों में महिलाओं ने कहा कि महंगी गैस के चलते वे चूल्हे पर खाना बनाने लगी हैं।

राजस्थान : स्वरोजगार से बदल रही है महिलाओं की आर्थिक स्थिति

गैर सरकारी संस्था उरमूल द्वारा उपलब्ध कराये गये काम की बदौलत राजस्थान के लूणकरणसर इलाके की ग्रामीण महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं बल्कि परिवार की आर्थिक तंगी को भी दूर कर रही हैं।

महंगाई की मार : प्याज-टमाटर और आलू के बढ़े दाम, वेज थाली हुई 7 फीसदी महंगी

आवक कम होने और कम आधार दर के कारण प्याज का दाम सालाना आधार पर 40 प्रतिशत, टमाटर का दाम 36 प्रतिशत और आलू का दाम 22 प्रतिशत बढ़ने से शाकाहारी थाली महंगी हो गई है।

रासायनिक खेती के उदय और विकास में वैश्विक शक्तियों की भूमिका और लाभ की राजनीति

रासायनिक कंपनियों द्वारा उत्पादित रासायनिक खादों, दवाओं और आनुवंशिक रूप से संशोधित बीजों को कृषि में प्रयोग करने के इतिहास की गहराई से छानबीन करने से पता चल सकता है कि दुनिया भर की सरकारों ने जानबूझकर सोची समझी रणनीति के तहत रासायनिक कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से इसकी अनुमति दिया और अपनी कृषि नीतियों में बदलाव किया।

मजदूरों को काम देने में नाकाम होती जा रही हैं बनारस की श्रम मंडियाँ

एक समय था जब असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को मंडियों में आसानी से काम मिल जाया करता था लेकिन आज स्थिति यह हो गई है कि पूरे महीने भर में केवल 10-15 दिन ही लोगों को रोजगार मिल पा रहा है। यह स्थिति मजदूरों के अनुसार पिछले 8-10 वर्षों में जयादा तेजी के साथ आई है।

बिहार : महंगे सिलेंडर के कारण गाँव में फिर से लौट रहा है मिट्टी के चूल्हे का दौर, फ्लॉप हुई उज्ज्वला योजना

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत 1 मई 2016 को की गई थी जिसका मकसद जीवाश्म ईंधन की जगह एलपीजी गैस को बढ़ावा देना, महिला सशक्तीकरण के साथ ही उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा करना आदि भी रहा है, लेकिन आज यह योजना महंगी गैस के चलते फ्लॉप होती जा रही है। बिहार के मुज़फ्फ़रपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड के कई गाँवों में महिलाओं ने कहा कि महंगी गैस के चलते वे चूल्हे पर खाना बनाने लगी हैं।

राजस्थान : स्वरोजगार से बदल रही है महिलाओं की आर्थिक स्थिति

गैर सरकारी संस्था उरमूल द्वारा उपलब्ध कराये गये काम की बदौलत राजस्थान के लूणकरणसर इलाके की ग्रामीण महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं बल्कि परिवार की आर्थिक तंगी को भी दूर कर रही हैं।

महंगाई की मार : प्याज-टमाटर और आलू के बढ़े दाम, वेज थाली हुई 7 फीसदी महंगी

आवक कम होने और कम आधार दर के कारण प्याज का दाम सालाना आधार पर 40 प्रतिशत, टमाटर का दाम 36 प्रतिशत और आलू का दाम 22 प्रतिशत बढ़ने से शाकाहारी थाली महंगी हो गई है।

रासायनिक खेती के उदय और विकास में वैश्विक शक्तियों की भूमिका और लाभ की राजनीति

रासायनिक कंपनियों द्वारा उत्पादित रासायनिक खादों, दवाओं और आनुवंशिक रूप से संशोधित बीजों को कृषि में प्रयोग करने के इतिहास की गहराई से छानबीन करने से पता चल सकता है कि दुनिया भर की सरकारों ने जानबूझकर सोची समझी रणनीति के तहत रासायनिक कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से इसकी अनुमति दिया और अपनी कृषि नीतियों में बदलाव किया।

लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार की मनरेगा मजदूरी में आंशिक बढ़ोतरी पर विपक्षी नेताओं ने कसा तंज

जहां एक तरफ चुनाव से पहले मनरेगा मजदूरी में आंशिक बढोरती कर सरकार वाहवाही लूट रही है, वहीं इस बार वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार मनरेगा के मद में लगभग 34 फीसदी की कटौती कर चुकी है।