Thursday, July 30, 2026
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पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

विनीत तिवारी

फिलिस्तीनी जनता का प्रतिरोध : हम किसी भी हालत में अपना देश नहीं छोड़ेंगे

 नई दिल्ली में 2 जुलाई, 2026 को में गाज़ा में नरसंहार के 1000वें दिन को कविताओं और एकजुटता भाषणों के साथ याद किया गया। सभा के विशेष अतिथि, फ़िलिस्तीन राज्य के राजदूत डॉ. अब्दुल्ला एम. अबू शावेश ने आईपीएसएन को इस सार्थक कार्यक्रम के आयोजन पर धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि वे फ़िलिस्तीनी लोगों के लिए न्याय, आज़ादी और सम्मान की माँग में आईपीएसएन के साथियों की इस एकजुटता और प्रतिबद्धता से बहुत प्रभावित हैं।

बांडुंग से ब्रिक्स : अमेरिकी साम्राज्यवाद के विकल्प की संभावनाएँ और चुनौतियाँ

ब्रिक्स के सहयोग के तीन प्रमुख क्षेत्र हैं: राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय तथा सांस्कृतिक और जन-जन के बीच आदान-प्रदान। आज अमेरिका को डॉलर-आधारित वर्चस्व का लाभ प्राप्त है। लगभग 67 देशों पर अमेरिकी शक्तियों द्वारा प्रतिबंध लगाए गए हैं। इस वर्चस्व को ध्वस्त करने के लिए ब्रिक्स ने द्विपक्षीय व्यापार, वैकल्पिक वित्तीय संदेश प्रणालियों तथा चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) जैसे व्यापारिक विकल्पों पर ध्यान केंद्रित किया है। ये छोटे, किंतु प्रभावशाली कदम एक बहुध्रुवीय आर्थिक व्यवस्था के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

वेनेज़ुएला पर हमला असभ्य गुंडागिरी की निशानी

दुनिया अच्छे से जानती है कि रूस और यूक्रेन के दरम्यान जंग छेड़ने और नाटो के मसले के पीछे भी अमेरिकी षड्यंत्र है, और फ़लस्तीन के ग़ज़ा में जारी नरसंहार के पीछे भी इजरायल को हासिल अमेरिकी शह है और अब अमेरिकी राष्ट्रपति एक सनकी की तरह व्यवहार करते हुए अपनी सनक में दुनिया को नाभिकीय युद्ध के मुहाने पर ला रहे हैं।

फ़िलिस्तीन की मुक्ति का स्वप्न और स्वप्न को पूरा करने की ताक़त हैं ग़सान कनाफ़ानी का लेखन

ग़सान कनाफ़ानी को याद करने की वजह सिर्फ़ यह नहीं है कि उनके साहित्य की बारीकियों को समझा जाए और उसके कलात्मक अवदान को समझा जाए बल्कि आज के दौर में कनाफ़ानी को याद करने का अर्थ है फ़िलिस्तीनी मुक्ति संघर्ष के साथ एकजुटता ज़ाहिर करना और उस फ़िलिस्तीन को बेहतर तरह से समझना जो आज लगभग आठ दशकों से इस तथाकथित आधुनिक दुनिया में इज़राएल के ज़ुल्मों को सहते हुए अपनी ही जमीन पर ग़ुलामों की तरह रहने पर मजबूर है।

निर्देशक प्रसन्ना की तीन-दिवसीय नाट्य कार्यशाला : श्रम के साथ अभिनय सीखा प्रतिभागियों ने

नाटककार प्रसन्ना एक सहज निर्देशक हैं। उन्होंने नाटक के कथ्यों की जटिलता को बहुत ही आसानी से प्रस्तुत करने के गुर कार्यशाला में उपस्थित अभिनेताओं को बताये। कोई भी व्यक्ति एक्शन-रिएक्शन कर लेने या संवाद बोल लेने से अभिनेता नहीं बन जाता बल्कि को चरित्र को जीते हुए उसमें घुसना जरूरी होता है इसका कोई फार्मूला नहीं होता बल्कि उस तक पहुँचने के लिए अभिनय के साथ मंच पर प्रस्तुति के दौरान ध्यान रखी जानी वाली बारीक बातों को प्रसन्ना ने साझा किया।

इंदौर में याद-ए-हबीब : ‘जिन लाहौर नईं वेख्या’ ने मनुष्यता की ऊँचाई दिखायी

हबीब तनवीर को उनके ही द्वारा मंचित और निर्देशित नाटक के अंश और नाटकों में गाये गीतों के माध्यम से 10 जून 2024 को इंदौर के अभिनव कला समाज सभागृह में "याद-ए-हबीब" कार्यक्रम में याद किया। श्रोताओं और दर्शकों की संख्या सभागार की क्षमता पार कर गई थी और नीचे बैठे और खड़े हुए लोगों ने भी अपनी जगह छोड़ना गवारा नहीं किया जब तक कार्यक्रम चलता रहा।

‘आवारा’ और ‘अनहोनी’ फिल्म पर कार्यक्रम का प्रीमियर

इस कार्यक्रम में थप्पड़, गुलाम, द्रोहकाल, आरक्षण जैसी प्रसिद्ध फिल्मों के लेखक अंजुम रजबअली ने ख़्वाजा अहमद अब्बास की कहानियों के पीछे रही उनकी सोच और कहन के तरीकों पर फिल्मों के कुछ दृश्यों को दिखाकर अपना विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग का सार्वजनिक प्रसारण फेसबुक प्रीमियर के रूप में 02 अगस्त 2021 को किया गया।
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