Monday, September 21, 2026
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पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

रिंकू कुमारी

लेखिका मुजफ्फरपुर, बिहार में रहती हैं।

बिहार : शहर या गाँव में अब न तो पुस्तकालय बचे न ही रुचि लेकर पढ़ने वाले पाठक ही

भले ही आज किसी शहर या कस्बे में मॉल का होना शान का प्रतीक माना जाता है लेकिन एक समय पुस्तकालय का होना पढ़े-लिखे लोगों के होने की निशानी माना जाता था। जिन जगहों पर पुस्तकालय थे आज या तो वे बंद हो चुके हैं या फिर खस्ताहाल में हैं क्योंकि न तो पहले की तरह पढ़ने वाले बचे हैं न सरकार की तरफ से पुराने पुस्तकालयों को बचाने की कोशिश ही की जा रही है। गाँव में पुराने पुस्तकालय बंद हो चुके हैं। आज की पीढ़ी पुस्तकालय में जाने की बजाय फ़ोन के जरिए जानकारी हासिल करने में ज्यादा विश्वास कर रही है।
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