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क्या प्रचंड प्रतिभा के धनी रचनाकार चुनारी लाल मौर्य जातिवाद के शिकार हुए

बीसवीं सदी के एक महत्वपूर्ण लेकिन धूल-धूसरित कवि चुनारी लाल कई उपनामों से लिखते थे। हालांकि उनका एक काव्य-संग्रह प्रकाशित हुआ और ढेरों पांडुलिपियाँ अभी भी अप्रकाशित हैं। उनकी कविताओं और गद्य में व्यंग्य की गहरी मार है। न केवल कवि बल्कि एक पत्रकार और आंदोलनकारी के रूप में चुनारी लाल ने बड़ी भूमिका निभाई। वे अक्खड़मिजाज और स्वाभिमानी व्यक्ति थे। मात्र पचास साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए इस कवि की उपेक्षा जातिवादी कारणों से भी हुई। ओमप्रकाश अमित एक आकलन ।

मिर्ज़ापुर : ढोलक बनानेवाले परिवार अच्छे दिनों के इंतज़ार में हैं

मिर्ज़ापुर के चुनार कस्बे में ढोलक बनानेवाले तीन परिवार बताते हैं कि हमारी दाल-रोटी चल जाती है लेकिन पहले वाली बात इसमें नहीं रही। इसलिए नई पीढ़ी के बच्चे अब इस काम में कोई दिलचस्पी नहीं रखते और दूसरे काम करते हैं। सामान्य आमदनी के चलते इनमें शिक्षा के प्रति ललक भी नहीं पैदा हुई इसलिए ज़्यादातर कारीगरी से विमुख हो मजदूरी की ओर जा रहे हैं।

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