Tuesday, July 23, 2024

अभिषेक श्रीवास्तव

बिहार में राज्यसभा सीट पर हमारा दावा वैध था : दीपांकर भट्टाचार्य

उन्होंने कहा, “महागठबंधन से नीतीश कुमार के बाहर निकलने के बाद भाकपा माले निश्चित रूप से आगामी लोकसभा चुनाव में बड़ी हिस्सेदारी मांगेगी। एक-दो दिन में आरजेडी समेत महागठबंधन के नेताओं से इस मामले पर चर्चा की जाएगी।’’

यूपी : पुलिस की मौजूदगी में हत्‍या 2023 में आम हो गई

उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल (मार्च 2017 से अब तक) में सरकारी दावे के अनुसार, राज्‍य की पुलिस ने 183 कथित अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराया।

अपराध वार्षिकी-2023 : सत्ता और अपराध के गठजोड़ से बदलता दिखा राजनीति का नैरेटिव

इस साल जरायम से जुड़ी कुछ ऐसी घटनाएं देखने को मिली जिनकी धमक आने वाले कई वर्षों तक प्रदेश के आपराधिक और कानूनी गलियारे के साथ राजनीति में भी देखने को मिलेगी

विकास के नाम पर भू-अधिग्रहण के अनुभव, परिदृश्‍य और सबक : रणकौशल का सवाल

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 28 जून, 2022 को जल-जंगल-ज़मीन की कॉर्पोरेट लूट, दमन और विस्थापन के खिलाफ जनसंघर्षों का एक दिवसीय राज्य सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में देशभर के 15 राज्यों (छत्तीसगढ़, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, ओड़िशा, जम्मू एंड कश्मीर, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, तमिलनाडु और उत्तराखंड) से 500 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सेदारी की। सम्‍मेलन के अंत में नौ प्रस्‍ताव पारित किए गए। शुरुआती तीन प्रस्‍ताव छत्तीसगढ़ केंद्रित होते हुए भी सामान्‍य प्रकृति के हैं, जिनमें विकास के नाम पर जमीन की लूट रोकने, पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में पेसा कानून और भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के अनुपालन की मांग दर्ज है। बाकी प्रस्‍ताव भी सामान्‍य प्रकृति के हैं। ये सभी प्रस्‍ताव मोटे तौर पर उन्‍हीं संकल्‍पों का दुहराव हैं जो आज से कोई आठ साल पहले ओडिशा के जगतसिंहपुर स्थित ढिंकिया में हुए जनसंघर्षों के दो दिवसीय सम्‍मेलन में पारित किए गए थे। तीन हिस्सों में प्रकाशित की जा रही अभिषेक श्रीवास्तव की लंबी रिपोर्ट का तीसरा और अंतिम भाग।

विकास के नाम पर भू-अधिग्रहण के अनुभव, परिदृश्‍य और सबक

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 28 जून, 2022 को जल-जंगल-ज़मीन की कॉर्पोरेट लूट, दमन और विस्थापन के खिलाफ जनसंघर्षों का एक दिवसीय राज्य सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में देशभर के 15 राज्यों (छत्तीसगढ़, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, ओड़िशा, जम्मू एंड कश्मीर, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, तमिलनाडु और उत्तराखंड) से 500 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सेदारी की। सम्‍मेलन के अंत में नौ प्रस्‍ताव पारित किए गए। शुरुआती तीन प्रस्‍ताव छत्तीसगढ़ केंद्रित होते हुए भी सामान्‍य प्रकृति के हैं, जिनमें विकास के नाम पर जमीन की लूट रोकने, पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में पेसा कानून और भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के अनुपालन की मांग दर्ज है। बाकी प्रस्‍ताव भी सामान्‍य प्रकृति के हैं। ये सभी प्रस्‍ताव मोटे तौर पर उन्‍हीं संकल्‍पों का दुहराव हैं जो आज से कोई आठ साल पहले ओडिशा के जगतसिंहपुर स्थित ढिंकिया में हुए जनसंघर्षों के दो दिवसीय सम्‍मेलन में पारित किए गए थे। तीन हिस्सों में प्रकाशित की जा रही अभिषेक श्रीवास्तव की लंबी रिपोर्ट का दूसरा भाग।

विकास के नाम पर भू-अधिग्रहण के अनुभव, परिदृश्‍य और सबक (1)

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 28 जून, 2022 को जल-जंगल-ज़मीन की कॉर्पोरेट लूट, दमन और विस्थापन के खिलाफ जनसंघर्षों का एक दिवसीय राज्य सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में देशभर के 15 राज्यों (छत्तीसगढ़, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, ओड़िशा, जम्मू एंड कश्मीर, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, तमिलनाडु और उत्तराखंड) से 500 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सेदारी की। सम्‍मेलन के अंत में नौ प्रस्‍ताव पारित किए गए। शुरुआती तीन प्रस्‍ताव छत्तीसगढ़ केंद्रित होते हुए भी सामान्‍य प्रकृति के हैं, जिनमें विकास के नाम पर जमीन की लूट रोकने, पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में पेसा कानून और भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के अनुपालन की मांग दर्ज है। बाकी प्रस्‍ताव भी सामान्‍य प्रकृति के हैं। ये सभी प्रस्‍ताव मोटे तौर पर उन्‍हीं संकल्‍पों का दुहराव हैं जो आज से कोई आठ साल पहले ओडिशा के जगतसिंहपुर स्थित ढिंकिया में हुए जनसंघर्षों के दो दिवसीय सम्‍मेलन में पारित किए गए थे। तीन हिस्सों में प्रकाशित की जा रही अभिषेक श्रीवास्तव की लंबी रिपोर्ट का पहला भाग।

कच्‍छ के सिख किसानों की व्‍यथा कथा

इस पूरे प्रकरण में केंद्र में राजू भाई सरदार नाम के जो शख्‍स हैं, उनका एक और अहम परिचय यह है कि वे लखपत में उदासी पंथ के ऐतिहासिक गुरुद्वारे के अध्‍यक्ष भी हैं। इसके अलावा वे प्रधानमंत्री के अल्‍पसंख्‍यक 15 सूत्री कार्यक्रम के सदस्‍य हैं और सिख बहुल नरा गांव के सरपंच रह चुके हैं। उनके बाकी परिचय उन्‍हीं के नाम की निजी वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं। इनमें सबसे गैर-ज़रूरी परिचय यह है कि वे लखपत के दयापर स्थित सरदार होटल और दीप्‍स रेस्‍त्रां के मालिक हैं।