Saturday, October 17, 2026
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पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

डॉ मुनीज़ा रफ़ीक़ खान

दम तोड़ रहा है पूर्वांचल का हथकरघा कारोबार, कला के कारीगर मजदूरी करने को मजबूर

जरदोज़ी का काम अब सिर्फ मजदूरी का काम बन गया है। लोग इस काम के अंतिम रूप को देखते हैं और अक्सर इसमें लगी मेहनत और कौशल को देख नहीं पाते। लॉकडाउन के पहले रोजाना 12 घंटे का काम मिलता था। अब रोजाना 8 घंटे का काम मिलता है। कई सारे कारखाने बंद हो रहे हैं। मंदी की हालत में लोगों को जैसा भी काम मिल रहा है, वही करने लगे हैं।

वाराणसी : बुनाई उद्योग को प्रभावित कर रहा है पूर्वांचल का साम्प्रदायिक विभाजन

व्यापारिक मीडिया खासकर टेलीविजन चैनलों की विभाजनकारी विमर्श को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका रही। इन चैनलों की खबरें न सिर्फ झूठी थीं, बल्कि इनका मकसद संविधानविरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाना था। परिणामस्वरूप बुनकर समुदाय सहित अल्पसंख्यकों को जिल्लत और तकलीफ़ों का सामना करना पड़ा।

पूर्वान्चल में बुनकरों को सरकारी राहत योजनाओं के लाभ की वास्तविकता

एक लोकतान्त्रिक देश में वोट बहुत महत्वपूर्ण है और इसे नागरिक को जन्म से मिलने वाला बुनियादी अधिकार समझा जाता है। आंकड़ों के अनुसार 184 (90 प्रतिशत) लोगों के पास वोटर पहचान पत्र था। 20 लोगों (10 प्रतिशत) के पास वोटर कार्ड नहीं था। इनसे जब वोटर पहचान पत्र नहीं रहने के कारण के बारे में पूछा गया तो  कुछ लोगों ने फॉर्म भरने के बारे में कहा तो कुछ लोगों ने बताया कि कुछ तकनीकी कारणों से उनका आवेदन नहीं पूरा हुआ तो कुछ ने बताया कि कुछ गलतियों या उपयुक्त दस्तावेज नहीं रहने के कारण आवेदन खारिज कर दिया गया है।
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