Tuesday, September 22, 2026
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पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

संदीप पांडेय

संदीप पाण्डेय सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) के महासचिव हैं।

किसने देवी कश्यप की जान ली

मोदी सरकार के समय गरीब की परिभाषा बदल गई है। अब गरीबी की सीमा बहुत ऊपर हो गई है। सबसे गरीब लोग उसी तरह बाहर रह गए हैं जैसे दलित जातियों के लोग व्यवस्था से बाहर रह गए थे। उनकी श्रेणी का कोई नाम नहीं है, ठीक वैसे ही जैसे जाति व्यवस्था में बहिष्कृत लोगों की कोई श्रेणी का नाम नहीं था। उनमें से कुछ लोगों के पास अब आधार कार्ड के लिए आवश्यक जन्म संबंधी दस्तावेज तक नहीं हैं, जिसके बिना किसी भी कल्याणकारी योजना का लाभ उठाना असंभव है। पढ़िए लखनऊ की देवी कश्यप की दर्दनाक कहानी।

जनता के खिलाफ साजिश करती योगी आदित्यनाथ की सरकार

संभल में हालिया महीनों की घटनाएँ एक डरावने माहौल का संकेत कर रही हैं। सरकार, न्यायालय व प्रशासन की मदद से हिन्दुत्ववादी ताकतों ने यहां फिलहाल तनाव व भय का माहौल तो निर्मित कर दिया है। कई मुस्लिम घर छोड़ कर चले गए हैं कि उन्हें मुकदमे में न फंसा दिया जाए। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ही लोगों के खिलाफ साजिश कर रही है। न्यायालय पक्षपात कर रहा है या उपासना स्थल अधिनियम 1991 की भावना का सम्मान करने को तैयार नहीं है तो दूसरी तरफ पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से सत्तारूढ़ दल की राजनीति का औजार बना हुआ है। संभल की घटनाओं के बहाने योगी सरकार के रवैये पर एक तब्सरा।

मणिपुर : लगातार उलझती जा रही समस्या का कब निकलेगा समाधान

मैतई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने के विरोध में पिछले डेढ़ वर्षों से लगातार आदिवासी समूहों में संघर्ष चल रहा है, जिसमें सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी आज तक मणिपुर नहीं गए, न ही समस्या के हल के लिए कभी कोई चर्चा ही की। इस प्रदेश में नागा एवं कुकी मैतेई द्वारा अनुसूचित जनजाति के दर्जे की मांग के खिलाफ हैं। मैतेई एवं नागा कुकी के अलग प्रशासन की मांग के खिलाफ हैं। मैतेई वृहत्तर नागालिम की मांग के खिलाफ हैं। सवाल उठता है कि कैसे और कब इस समस्या का कोई हल निकलेगा। 

Lok Sabha Election : सर्वोच्च न्यायालय ईवीएम से चुनाव कराने और वीवीपीएटी के अपने दिये गए फैसले पर पुनर्विचार करे

वोट किसी को दिया और वीवीपीएटी में वोट किसी दूसरी पार्टी को गया, ऐसी अनेक शिकायतें ईवीएम द्वारा वोट देने पर सामने आ रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने 26 अप्रैल को मतपत्रों से होने वाले चुनावों की दिक्कतें बताते हुए ईवीएम से ही चुनाव कराये जाने का फैसला सुनाया। न्यायालय ने भले यह कहा हो लेकिन जनता का एक बड़ा तबका मतपत्रों के माध्यम से ही चुनाव कराये जाने के पक्ष में है।

EVM के खिलाफ मतपत्र (बैलेट पेपर) से मतदान के पक्ष में एक सत्याग्रह

चण्डीगढ़ के महापौर चुनाव में मतपत्र में की जा रही हेरा-फेरी पकड़ी गई। अगर यही हेराफेरी मशीन के अंदर हो रही होती तो कैमरे से न पकड़ी जाती, शायद वहां मौजूद चुनाव अधिकारी भी न जान पाते कि मशीन के अंदर हेरा-फेरी हो रही है।
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