TAG
africa black panther andolan
जातिवादी अन्याय के खिलाफ एक अग्निपुंज थे राजा ढाले
मुझे आज भी यह घटना नहीं भूलती जब मेरे घर पर शिवकुमार मिश्र और राममूर्ति त्रिपाठी आए थे। दोनों को यह पता चला कि राजा ढाले यहाँ रहते हैं तब दोनों ने उनसे मिलने की इच्छा जाहिर की। बातचीत करते-करते खाने का समय हो गया। जैसे ही थाली लगने लगी ढाले जी चले गये। मेरी माँ ने कहा उनकी भी थाली लगी है। मेरे पिता जी उन्हें बुलाने गये और साथ में खाना खाया। तब ढाले जी ने कहा मैंने कभी नहीं सोचा था काशी के ब्राहमण हमारे साथ खाना खायेंगे।

