बंगाल, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और अब महाराष्ट्र में एक हफ्ते में हुई रेप की घटनाओं के बाद यदि विश्लेषण करें तो मालूम होगा कि त्वरित कार्रवाई वहीं हुई जहां जनता ने दबाव बनाया। बंगाल को छोड़कर सभी प्रदेश भाजपा शासित हैं या फिर वहाँ भाजपा समर्थित सरकारें हैं। जब-जब भाजपा शासित प्रदेशों में घटनाएं हुईं, वहाँ सरकार किसी तरह का कोई कार्रवाई न कर अपराधी को संरक्षित किया है। सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा की मानसिकता अपराधी या गुनहगार को बचाकर ऐसे अपराधों को सीधे-सीधे बढ़ावा देना नहीं है?
कोलकाता की डॉक्टर की नृशंस तरीके से कार्यस्थल पर हत्या की गई और इसके साथ दूसरी जगहों से भी लगातार बलात्कार की खबरें आ रही हैं। आज पूरा देश डॉक्टर के न्याय के लिए उतरा है। इस तरह की घटनाओं का देशव्यापी विरोध होना इसलिए जरूरी है क्योंकि सरकार बलात्कारियों को बचाने का काम कर रही है। वैसे भी अनगिनत केस दर्ज नहीं किए जाते लेकिन जो केस दर्ज होते हैं, उन्हें भी राजनैतिक दबाव व संरक्षण के चलते सजा नहीं मिलती बल्कि स्वागत किया जाता है। उनका इस तरह खुला घूमना सरकार के साथ न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है