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Lalayi Singh Yadav
ब्राह्मणवादी परंपरा के भंजक नास्तिक-बौद्धिक पेरियार ललई सिंह
उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रांत) में स्वामी अछूतानंद (1879-1933) और रामचरन (1888-1939) के ‘आदि हिंदू’ आंदोलन के माध्यम से हाशिए के मेहनतकश और निम्न कही जानी वाली जातियों में नई चेतना का संचार किया। सामाजिक न्याय और समता के आदर्शों से प्रेरित इनकी वैचारिकी ब्राह्मणवादी शोषण की व्यव्स्था के विरुद्ध सशक्त उद्घोष थी। इसी दौर में चंद्रिका प्रसाद ‘जिज्ञासु’, संतराम बी.ए., रामस्वरूप वर्मा आदि के साथ पेरियार ललई सिंह एक प्रमुख नाम थे। इन सभी के मानवीय और समतामूलक राष्ट्र-निर्माण को हिंदी समाज की वर्चस्वशाली सामाजिक और सांस्कृतिक चिंतनधारा से सायास अनुपस्थित और अचर्चित रखा गया।

