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मालेगांव विस्फोट मामला : सत्रह साल बाद पीड़ितों के जख्म पर नमक की तरह आया फैसला
मालेगांव विस्फोट का मामला महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्ते के पास था। वर्ष 2011 में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने इस मामले को अपने हाथ में लिया। अदालत ने पाया कि अभियुक्तों के शामिल होने का प्रबल संदेह है, लेकिन अभियोजन पक्ष इसे संदेह से परे साबित नहीं कर पाया, इसलिए सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया गया। सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया, जो पीड़ितों के लिए एक बड़ा झटका और हिंदुत्व खेमे के लिए जश्न का विषय था।
सौ साल से अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाने की संघी कोशिशें अब फूल-फल रही हैं
अल्पसंख्यक समुदायों पर संघ और उसके आनुषंगिक संगठनों के हमले तेज हो चुके हैं जिसके शिकार हजारों लोग हुये हैं। आरएसएस द्वारा तैयार हिंदुवादी संगठनों को एक ही लक्ष्य दिया जाता है, कि वे अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक स्थलों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमला करें। आरएसएस के ट्रेनिंग संस्थानों में तैयार किए जा रहे युवक-युवतियों का ब्रेनवाश कर अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहर भरने का काम अच्छी तरह से किया जा रहा है, जिसके बाद वे अपना दिमाग चलाना बंद कर देते हैं। आरएसएस के संस्थापकों में एक डॉ बी एस मुंजे की डायरी के हवाले से इस लेख में बताया गया है कि सौ साल पहले इसकी प्रेरणा आरएसएस को मुसोलिनी से मिली जब वे इटली गए थे।

