Browsing Tag

panch parmeshwar

दिल्ली दंगा और यादव बनाम ब्राह्मण जज ( डायरी  15 अक्टूबर, 2021)

समाज को कैसे देखा और समझा जाय, इसका निर्धारण समाज के मानदंडों से ही होता है और ये मानदंड वे बनाते हैं जो समाज में अपना वर्चस्व रखते हैं। यह…
Read More...

मेरे लिए लिखने का मतलब निर्बल और सताए हुए लोगों के साथ खड़ा होना है (कथाकार,इतिहासकार सुभाषचन्द्र…

मेरी कहानियों में स्त्री-पुरुष प्रेम प्रधान कहानियां बहुत कम हैं। उसका कारण यह भी है कि इस क्षेत्र में मैंने बहुत कम मशक्कत की है। बातचीत…
Read More...