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Rajendra Sharma
लक्ष्मीजी वर दो, बेघर पीएम को घर दो!
लक्ष्मीजी बेचैन थीं। साल का अकेला दिन था ऑफीशियली पूजे जाने का। वैसे दूसरे देवी-देवता तो जब देखो, तब इसके ताने मारते थे कि...
विश्व गुरु हो तो ऐसा, युद्ध और शांति दोनों की चाह एक साथ
भई इसे कहते हैं विश्व गुरु वाला दांव। एक साथ दो नावों पर सवारी। बेशक, मुश्किल काम है। बल्कि लोग तो जोखिम का काम...
है तो यह मोदी प्रचार यात्रा लेकिन सरकारी संकल्प यात्रा के नाम पर
नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के ऐन आखिर में, देश एक ऐसी बहस देख रहा है, जिसकी पहले किसी ने कभी कल्पना भी नहीं...
मूँदहु आंख भूख कहुं नाहीं
अब गरज तो विश्व गुरु कहलाने से है, भूख बढ़ाने में विश्व गुरु कहलाए तो और भूख मिटाने में विश्व गुरु कहलाए तो। उसके ऊपर से 111 की संख्या तो वैसे भी हमारे यहां शुभ मानी जाती है। भारत चाहता तो पिछली बार की तरह, भूख सूचकांक पर 107वें नंबर पर तो इस बार भी रह ही सकता था। पर जब 111 का शुभ अंक उपलब्ध था, तो भला हम 107 पर ही क्यों अटके रहते? कम से कम 111 शुभ तो है। भूख न भी कम हो, शुभ तो ज्यादा होगा।
चाहे अडानी के घोटाले पर घोटाले निकलते जाएँ लेकिन अमृतकाल में नंबर लेखकों-पत्रकारों का ही आएगा
शुक्र है आखिरकार अरुंधती राय का नंबर आ ही गया। वर्ना भक्त बेचारे तो इंतजार करते-करते थक चले थे। अपने भगवान के न्याय में...
अब सीधे ऊपर से सलेक्शन!
इन विपक्षियों ने अधर्मीपन की क्या हद ही नहीं कर दी! बताइए‚ खुद ईश्वर के चुनाव पर भी सवाल उठा रहे हैं। जिसे खुद...
अंदरूनी मामले कितने अंदरूनी, बाहरी आलोचनाएं कितनी बाहरी
वास्तव में यह दिन 1879 में इसी रोज शुरू हुई फ्रांसीसी क्रांति की सालगिरह के रूप में मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत इस कुख्यात जेल में बंद क्रांतिकारियों को छुड़ाने के लिए हमला कर जेल तोड़े जाने के साथ हुई थी। जाहिर है कि भारत से भी बढ़कर फ्रांस में, मानवता को 'स्वतंत्रता, समानता तथा भाईचारा' के लक्ष्य देने वाली, इस फ्रांसीसी क्रांति की सालगिरह की परेड में मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री मोदी जैसे भाईचारा-विरोधी नेता को बनाए जाने की काफी आलोचना हुई है।

