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relative deprivation
क्या बहुजनों में सापेक्षिक वंचना का अहसास होता तो मोदी-योगी और करणी सेना का अस्तित्व न होता?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दस सालों में संसद में मिले विपुल बहुमत का उपयोग सबसे अधिक सवर्ण वर्चस्व कायम करने में किया है। इस क्रम में वर्ग संघर्ष का ऐसा इकतरफा खेल खेला है जिसकी नई सदी में कोई मिसाल ही नहीं है। दुनिया में कहीं भी सुविधाभोगी वर्ग के हित में ऐसी नीतियां ही नहीं बनीं। सवर्ण हितों में इकतरफा नीतियां बनाते देख सवर्णों का हर तबका मोदी का आँख मूँदकर समर्थन कर रहा है। पढ़िये जाने-माने लेखक एच एल दुसाध का विचारोत्तेजक विश्लेषण ।

