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कुछ और कम हुआ बनारस, जस की तस धर दीनी चदरिया, नहीं रहे अलकबीर

‘जीवन का यह एक नजरिया, भिगो ना पाये मय का दरिया, साकी तेरे दर की गुजरिया, जस की तस धर दीनी चदरिया’। इस शायरी के शायर अलकबीर आज सुबह इस दुनिया को अलविदा कह देह की चादर को जस की तस धर-सहेज कर चले गए। बनारस के जाने-माने शायर और ‘गाँव के लोग’ पत्रिका के प्रबंध संपादक रहे अलकबीर का इंतकाल बनारस की रंगत को कुछ और फीका कर देने वाले आघात की तरह है। 76 वर्षीय अलकबीर ने जगतगंज स्थित अपने आवास पर आज अंतिम साँस ली। अलकबीर के इंतकाल की ख़बर सुनते ही साहित्य जगत के साथ उनके चाहने वालों की आँखें नम हो गईं। वह अपने पीछे दो बेटे, एक बेटी और पत्नी का  भरा-पूरा परिवार छोड़ गए।

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