Thursday, July 18, 2024

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दिल्ली विश्वविद्यालय में मनुवादियों की NFS लीला रुकेगी कब?

प्राचीन समय से मनुवादियों ने समाज के दलित-वंचित समुदाय को शिक्षा लेने से वंचित रखने के लिए मनुस्मृति का सहारा ले उन्हें भरमाया। जब-जब वे पढ़ना चाहे, तब-तब पढ़ने से रोकने के लिए उन्हें अपमानित कर अपना पुश्तैनी काम करने के लिए कहा। देश में संविधान -लागू होने के बाद सभी को समान अधिकार प्राप्त हुआ, उसके बाद, जब ओबीसी,एससी और एसटी वर्ग के लोग शिक्षित हो बेहतर योग्यता से सामने आने लगे तब उनकी बेचैनी सामने आने लगी। इस वजह से उन्हें दिये गए आरक्षण को किसी भी तरह से रोकने के लिए शातिर तरीके अपना रहे हैं। अभी लगातार अनेक विश्वविद्यालयों से आरक्षित पदों के उम्मीदवारों को NFS करने की सूचना आ रही है। सवाल यह उठता है कि क्या सभी योग्यता सवर्णों में और सारी अयोग्यता ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग में है।

समाज में फैले भ्रष्टाचार के लिए कौन जिम्मेदार है 

किसी भी देश का तंत्र(सिस्टम) कैसा है, जानने के लिए वहाँ की राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति से पता किया जा सकता है। यदि सिस्टम भ्रष्ट है तो वहाँ रहने वाले लोग भी भ्रष्ट होंगे। हमारे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने वाले संगठन, दल, गैर सरकारी संस्थाएं और समाज के लोग खुद ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में लिप्त हैं। पढ़िये तेजपाल सिंह 'तेज' का यह लेख

लोकल हीरो : दो बच्चों को गोद लेने की इच्छा एक पूरे समुदाय के बच्चों का जीवन बदलने का अभियान कैसे बनी?

बनारस के कुख्यात रेडलाइट एरिया शिवदासपुर में बहुत कुछ बदल गया है। ऊपर से यह इलाका नयी इमारतों और बाज़ारों से जगमगा रहा है लेकिन असली बदलाव अंदर आ रहा है। शहर की एक महत्वपूर्ण संस्था गुड़िया ने रेडलाइट एरिया के बच्चों के जीवन में एक नयी रौशनी पैदा की है और वे पढ़ते-लिखते हुये अपने लिए एक बेहतर और सम्मानजनक जीवन जीने की तैयारी कर रहे हैं। गुड़िया संस्थान के कर्ता-धर्ता अजित सिंह और सांत्वना मंजू ने देह व्यापार के विरुद्ध भारत के सबसे बड़े अभियानों का नेतृत्व किया है। पढ़िये कैसे अनाथालय में पली-बढ़ी एक बच्ची ने अपना जीवन समाज से अपमानित और बहिष्कृत बच्चों की बेहतरी में लगा दिया।

वाराणसी : बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापकों ने डिजिटल उपस्थिति के साथ अन्य मांगों के लिए किया विरोध प्रदर्शन

अध्यापकों की नियुक्ति पढ़ाने के लिए की जाती है लेकिन सरकार द्वारा सौंपे गए अनेक कामों के बाद बच्चों पर पर्याप्त ध्यान ही नहीं दे पाते। यह बात शिक्षक ने बताई। इधर सरकार द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापक पर डिजिटल उपस्थिति दर्ज करने का नियम लागू किया गया है। लेकिन अध्यापक लगातार विरोध कर रहे हैं। अध्यापक इसके अलावा भी अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंप चुके हैं। उनका कहना है जब तक सरकार हमसे बात नहीं करती यह विरोध-प्रदर्शन बंद नहीं होगा.

अरुणाचल में मेगा बांध परियोजनाओं में प्रस्तावित और तैयार बांध प्रकृति के लिए खतरा – सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)

इधर लगातार बारिश से पहाड़ी इलाकों में तबाही की स्थिति बढ़ती ही जा रही है। इसके बावजूद अरुणाचल प्रदेश में 169 से ज़्यादा प्रस्तावित बांध हैं, जो प्रकृति का दोहन करेंगे और लोगों के लिए ख़तरा बनेंगे। सरकार को वहाँ के नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क होना जरूरी है।

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