Sunday, June 23, 2024
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टेबल पत्रकारिता के दौर में गौर किशोर घोष की याद

जाने-माने पत्रकार गौर किशोर घोष की आज जयंती है। लेखक गौरदा के गहरे मित्र रहे हैं। उन्हें करीब से जानने और साथ रहने का मौका मिला। उन्होंने साथ रहते हुए उन्हें जाना। उन्हीं बातों को लेकर एक संस्मरणात्मक लेख।

देवरिया : फासीवादी सरकार द्वारा लेखिका अरुंधति रॉय और प्रो. शेख शौकत पर यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने पर विरोध दर्ज

समाज के बुद्धिजीवी वर्ग से सरकार लगातार भयभीत होती दिखाई देती है। इस वजह से पिछले दस वर्षों से भाजपा ने लगातार लोगों के बोलने पर रोक लगाई। जिन लोगों ने उनके खिलाफ बोला या लिखा उन्हें या तो जेल में डाल दिया या उन पर सख्त कार्रवाई की गई।

कुमाऊनी बोली और भाषा से जुड़कर क्या नई पीढ़ी उसे संरक्षित कर पाएगी?

किसी भी भाषा का विकास आने वाली पीढ़ी से संभव है लेकिन कुमाऊनी भाषा अपने ही क्षेत्र में कम बोली जारही है जिससे आज की पीढ़ी अपनी भाषा बोलने और सीखने में शर्म महसूस करती है जो चिंताजनक बात है।

वाराणसी : आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के दो दिवसीय शिक्षण सामग्री विकास कार्यशाला का समापन

वाराणसी के इग्नस पहल द्वारा बड़ागांव व पिंडरा ब्लॉक में आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

राजस्थान : पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक तरीके और ग्राम समुदाय की सहभागिता से संभव है

पूरी दुनिया में विकास के बदले पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचा है, उसका खामियाजा लगातार असमय जलवायु परिवर्तन के माध्यम से भुगत रहे हैं। इन दिनों भारत में गर्मी का तापमान 52 डिग्री तक पहुँच जाना खतरे का संकेत है। विकास के नाम पर लाखों पेड़ों की कटाई से जल,जंगल,जमीन में रहने वाले कुछ जीव-जन्तु,, पेड़-पौधे लुप्तप्राय हो चुके हैं। पहले के पारंपरिक प्रयास भले ही जीवन को धीमी गति से आगे बढ़ाते थे लेकिन तब पर्यावरण सुरक्षित था। अब यह तो संभव नहीं है लेकिन नए तरीकों से काम करते हुए भी पर्यावरण संरक्षित करने का प्रयास शुरू कर देना चाहिए।

टेबल पत्रकारिता के दौर में गौर किशोर घोष की याद

जाने-माने पत्रकार गौर किशोर घोष की आज जयंती है। लेखक गौरदा के गहरे मित्र रहे हैं। उन्हें करीब से जानने और साथ रहने का मौका मिला। उन्होंने साथ रहते हुए उन्हें जाना। उन्हीं बातों को लेकर एक संस्मरणात्मक लेख।

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समाज के बुद्धिजीवी वर्ग से सरकार लगातार भयभीत होती दिखाई देती है। इस वजह से पिछले दस वर्षों से भाजपा ने लगातार लोगों के बोलने पर रोक लगाई। जिन लोगों ने उनके खिलाफ बोला या लिखा उन्हें या तो जेल में डाल दिया या उन पर सख्त कार्रवाई की गई।

कुमाऊनी बोली और भाषा से जुड़कर क्या नई पीढ़ी उसे संरक्षित कर पाएगी?

किसी भी भाषा का विकास आने वाली पीढ़ी से संभव है लेकिन कुमाऊनी भाषा अपने ही क्षेत्र में कम बोली जारही है जिससे आज की पीढ़ी अपनी भाषा बोलने और सीखने में शर्म महसूस करती है जो चिंताजनक बात है।

वाराणसी : आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के दो दिवसीय शिक्षण सामग्री विकास कार्यशाला का समापन

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पूरी दुनिया में विकास के बदले पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचा है, उसका खामियाजा लगातार असमय जलवायु परिवर्तन के माध्यम से भुगत रहे हैं। इन दिनों भारत में गर्मी का तापमान 52 डिग्री तक पहुँच जाना खतरे का संकेत है। विकास के नाम पर लाखों पेड़ों की कटाई से जल,जंगल,जमीन में रहने वाले कुछ जीव-जन्तु,, पेड़-पौधे लुप्तप्राय हो चुके हैं। पहले के पारंपरिक प्रयास भले ही जीवन को धीमी गति से आगे बढ़ाते थे लेकिन तब पर्यावरण सुरक्षित था। अब यह तो संभव नहीं है लेकिन नए तरीकों से काम करते हुए भी पर्यावरण संरक्षित करने का प्रयास शुरू कर देना चाहिए।

खेलों में खिलाड़ी कभी हारता नहीं बल्कि खेलने का हौसला मिलता है – सुजीत यादव

जय बजरंग क्रिकेट स्पोर्टिंग क्लब, अतरसुआ (चीनी मिल ग्राउण्ड) नन्दगंज के तत्वावधान में क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन हुआ। नौ दिन चले इस टूर्नामेंट में खिलाड़ियों ने खेल भावना को मजबूत करने के लिए उत्साह से हिस्सा लिया।