Monday, January 12, 2026
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पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

सुधा अरोड़ा

लेखिका सुप्रसिद्ध कहानीकार हैं। स्त्री विमर्श को लेकर बहुत काम किया है।

धर्म की अफीम महिलाओं ने अधिक चखी और राजनीति ने इनका भरपूर फायदा उठाया

महिलाएं परिवार और धर्म में इतना लिप्त हो जाती हैं कि उन्हें मालूम ही नहीं चलता कि उनके ऊपर पितृसत्ता, अर्थसत्ता, राजनीतिक शक्तियां, जातिवर्चस्व, धर्मसत्ता हावी हो गया है बल्कि वे इसे सहजता से स्वीकार कर लेती हैं। हर धर्म ने ही महिलाओं की तार्किक सोच को खत्म करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसका फायदा राजनीति को खूब हुआ है।

लेखक की निजी ज़िन्दगी और रचना संसार के बीच का ‘नो मेंस लैंड’

फिल्म में उन समस्याओं और सवालों को ज़रूर उठाया गया है जिसे आज के समय में भी जोड़कर देखा जा सकता है और जो आज भी हमारे देश की विकराल समस्याएँ हैं, निर्देशक इसके लिए बधाई की हकदार हैं कि वे आज के माहौल के कुछ सवालों से मंटो के बहाने मुठभेड़ कर पाई ! आज जब मारे जाने के लिए मुसलमान होना ही काफ़ी है, फिल्म में कुछ गहरे तंज करने वाले संवाद हैं – 'इतना मुसलमान तो हूँ ही कि मारा जा सकूँ!'

इन्हें किसी बैसाखी की जरूरत नहीं

 पिछले पचास सालों में यह बदलाव तो आया ही है कि क्षेत्र कोई भी हो, आप उसमें साधिकार, सप्रमाण, सगर्व कुछ ऐसी महिलाओं के...
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