Wednesday, July 24, 2024
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धन उपलब्ध होते ही सामाजिक प्रतिबद्धता डगमगाने लगती है

धन उपलब्ध होते ही सामाजिक प्रतिबद्धता डगमगाने लगती है

बातचीत का पहला हिस्सा कुछ साल पहले आपका एक उपन्यास प्रकाशित हुआ था  ‘नरक मसीहा’ जिसकी काफी चर्चा रही है। यह उपन्यास एनजीओ की भीतरी...

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