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बॉलीवुड

हम मेहनतकश जग वालों से जब अपना हिस्सा मांगेंगे…

मजदूर एक स्वतंत्र नागरिक है। उसकी सबसे बड़ी पूंजी उसका स्वस्थ शरीर, श्रमशक्ति, उसका हुनर और रोजगार की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान के लिए…
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एक अभिनेता और एक कवि जो गहरे दोस्त भी थे और जन मन के चितेरे भी

राज कपूर की जयंती और शैलेंद्र की पुण्यतिथि पर उन दोनों की दोस्ती को याद करते हुये ....  हिन्दुस्तानी सिनेमा में सामूहिकता को साकार करने…
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बॉलीवुड ने कैम्पस के जीवन और राजनीति का उथला चित्रण किया है

भारतीय शिक्षा व्यवस्था और उसके विभिन्न पहलुओं पर बहुत कम फ़िल्में बनी हैं। शिक्षण संस्थानों की बात करें तो तक्षशिला, नालंदा विश्वविद्यालय और…
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केवल पैसा ही नहीं खींचता था बल्कि दिमागों पर काबू भी रखता था सिनेमा का सांप

सांप संपेरे की झपोली में हो या फिल्म के परदे पर लेकिन जनता का मनोरंजन करने की ज़िम्मेदारी सदियों से उनके ऊपर है। भूत, चुड़ैल से लेकर खतरनाक…
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अभी बहुत दूर है साहित्य पर शानदार फिल्में बनाने का बालीवुडीय सपना

जब तक बॉलीवुड भारतीय समाज की सही समझ नहीं विकसित करता और जातीय और साम्प्रदायिक पूर्वाग्रहों से मुक्त नहीं होता तब तक वह साहित्यिक कृतियों का…
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