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भाजपा पाठ्यक्रम बेहतर बना रही है या अपना इतिहास

नेहरू की आधुनिक भारत के मंदिरों की परिकल्पना को भी किताबों से हटा दिया गया है। आखिर नेहरू और सांप्रदायिक सोच एक ही किताब में एक साथ कैसे रह सकते थे। जो वाक्य हटाया गया है वह यह है: 'आखिर इस जगह, इस भाखड़ा नंगल से महान क्या हो सकता है जहाँ हजारों-लाखों ने अपना खून-पसीना बहाया और अपने जीवन का बलिदान भी दिया।

हिंदी सिनेमा में जाति के चित्रण की समझदारी

दिवंगत सुजाता पारमिता अभिनेत्री, रंगकर्मी, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता थीं। वह राष्ट्रीय फिल्म एवं टेलीविज़न संस्थान, पुणे की स्नातक थीं। उन्होंने दिल्ली में आह्वान थियेटर समूह की स्थापना की। सुजाता विविध कलात्मक रुचियों से समृद्ध थीं और वारली लोककला पर विशेष काम किया था। यह लेख  उनकी पुस्तक 'मानसे की ज़ात' से लिया गया है। 

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