Wednesday, September 23, 2026
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पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

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रमाकांत यादव : सामंतवाद के खिलाफ उठी आवाज सियासी गलियारे में पहुँचकर स्वयं सामंती चेहरे में बदल गई

बाहुबल का ऐसा रसूख कि पत्नी के खिलाफ जब पूर्व मुख्यमंत्री ने चुनाव लड़ा तो पूर्व मुख्यमंत्री को ना झण्डा उठाने वाले मिले, ना झण्डा लगाने की जगह मिली। आज भी हवा में फैली हुई यह बात मन को कंपा देती है कि इन्होंने चार ठाकुरों को जिंदा ही दफना दिया था, पर यह बात ना किसी कानून के पन्ने में दर्ज हुई है, ना इतिहास इसका कोई साक्ष्य देता है। लोग आज भी इस बात पर बस इतना बोलते हैं कि ‘सुना तो है पर जानते नहीं हैं कि सच्चाई क्या है?’ उत्तर प्रदेश की हर बड़ी पार्टी से मुहब्बत भी की और बगावत भी। दिग्गज राजनेता मुलायम सिंह यादव के खिलाफ भाजपा ने जब चुनाव मैदान में उतारा तो जीत के लिए मुलायम को भी लोहे के चने चबाने पड़ गए। जिस आदमी ने कभी पिता के दिखाए हुए रास्ते पर चलकर सामंतवाद के खिलाफ सामाजिक न्याय की लड़ाई शुरू की वही आगे चलकर आजमगढ़ का सामंती चेहरा बन गया। आज भी रमाकांत के खिलाफ बोलना गुनाह से कम नहीं है। RKY का स्टीकर होना ही किसी भी गलत पर पर्दा डालने के लिए काफी था। फिलहाल 2017 के बाद से रुतबे पर योगी के अंकुश का असर दिखने लगा है। 

डीपी यादव : यूपी की हर सत्ता में सुरक्षा पाता रहा गाजियाबाद का शराब किंग

दूध के कारोबार से दुनियादारी शुरू की पर पहचान बनी दारू। जब दारू का नशा सिर चढ़कर बोलने लगा तब सत्ता के सियासी गलियारे में भी अपनी कुर्सी बुक करवा ली। सियासी सफर में जब सम्मान दांव पर लगा तो हथियारों की हुंकार से हवाओं में अपने नाम की सिहरन भर दी। हर पार्टी के साथ पर हर जगह अपनी मनमानी की, जिसकी वजह से किसी के साथ लंबा साथ नहीं चला तब अपनी ही पार्टी बना ली। अब राजनीति का राग कमजोर पड़ गया है, असलहों के बल पर हासिल की हुई ताकत कमजोर हो गई, फिलहाल कविता की किताब जरूर छप गई।

भदोही के भैयाजी : ब्राह्मण हैं इसलिए डरते हैं कि कहीं गाड़ी न पलट जाए

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बाहुबल की बात हो तो बड़े रुआब के साथ जो नाम सामने आता है वह है भदोही के विजय मिश्रा का। दशकों तक भदोही और आस-पास के जिलों में राजनीति की हर हवा के खिलाफ जिस माफिया का बवंडर चला करता था आज वह एनकाउंटर के डर से कांप रहा है। 2017 में अखिलेश यादव ने अपराध और राजनीति के साझे को तोड़ने की जो कवायद की थी उसकी सबसे बड़ी गाज जिन कुछ अपराधियों पर गिरी, उनमें से एक हैं विजय मिश्रा। विजय मिश्रा भदोही के रहने वाले हैं।

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