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dahej pratha
थोथी बहस नहीं, स्त्रियों के प्रति मानवीय व्यवहार से ख़त्म होगी दहेज की मानसिकता
किसी समय में दहेज का अर्थ इतना वीभत्स और क्रूर नहीं था, जितना आज के समय में हो गया है। दरअसल दहेज, शादी के समय पिता की ओर से बेटी को दिया जाने वाला ऐसा उपहार है, जिस पर बेटी का अधिकार होता है। पिता अपनी बेटी को ऐसी संपत्ति अपनी स्वयं की इच्छा से देता था और अपनी हैसियत के मुताबिक देता है।
तमाम दावों के बीच स्त्रियों के सामने बढ़ती हुई चुनौतियाँ
भारतीय संस्कृति में स्त्रियों के गौरव के लिए कहा गया है, यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः। अर्थात् जहाँ...
लालमणि को ठोकर मारकर बन गए श्रीनाथ
दौर कोई भी हो दिखावा और आडम्बर इंसानी फितरत का एक जरुरी हिस्सा बन गया है। शादी हो या कोई त्यौहार या कोई भी...

