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Fascism

आज के परिपेक्ष्य में संवैधानिक मूल्य बचाने के लिए लोकतंत्र को सशक्त करने की जरूरत

भारत में फासीवाद के लक्षणों को उभर रहा हैं जैसे स्वर्णिम अतीत, अखंड भारत की अभिलाषा, अल्पसंख्यकों को देश का शत्रु करार देकर निशाना बनाना, अधिनायकवाद, बड़े उद्योग-धंधों को बढ़ावा देना, अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रहार और सामाजिक चिंतन पर हावी होना तेजी से बढ़ रहा है।

सौ साल से अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाने की संघी कोशिशें अब फूल-फल रही हैं

अल्पसंख्यक समुदायों पर संघ और उसके आनुषंगिक संगठनों के हमले तेज हो चुके हैं जिसके शिकार हजारों लोग हुये हैं। आरएसएस द्वारा तैयार हिंदुवादी संगठनों को एक ही लक्ष्य दिया जाता है, कि वे अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक स्थलों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमला करें। आरएसएस के ट्रेनिंग संस्थानों में तैयार किए जा रहे युवक-युवतियों का ब्रेनवाश कर अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहर भरने का काम अच्छी तरह से किया जा रहा है, जिसके बाद वे अपना दिमाग चलाना बंद कर देते हैं। आरएसएस के संस्थापकों में एक डॉ बी एस मुंजे की डायरी के हवाले से इस लेख में बताया गया है कि सौ साल पहले इसकी प्रेरणा आरएसएस को मुसोलिनी से मिली जब वे इटली गए थे।

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