2024 के बाद से ही शक्ति संतुलन में नया परिवर्तन दिखने लगा है, यानि 2014 के बाद से लगातार जो पावर का पलड़ा संघ-भाजपा के पक्ष में झुका हुआ दिखता था, अब उसमें परिवर्तन दिखने लगा है।यानि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच बार-बार जो तालमेल देखा जा रहा था वहां एक शिफ्टिंग दिख रही है।
संविधान के विरुद्ध किए गए फैसलों के लिए 12 दिसंबर को सुनवाई हुई और सुनवाई के दौरान CJI संजीव खन्ना को आदेश दिया गया कि जब तक मोदी सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आता, तब तक कोई सुनवाई नहीं होगी, कोई कार्रवाई नहीं होगी, कोई नई याचिका नहीं डाली जाएगी। लेकिन केंद्र सरकार ने संविधान को ताक में रखते हुए आज तक कोई जवाब नहीं दिया। सवाल यह उठता है कि क्या मोदी सरकार न्यायपालिका से ऊपर है?