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meera kumar

नवउदारवादी युग में महिलाएं और सियासत (डायरी, 25 नवंबर 2021)

हिसाब से मानव समाज के दो ही आधार हैं। एक स्त्री और दूसरा पुरुष। बाकी तो जो है, वह रिश्ता है। रिश्ते के हिसाब से हम जीवन जीते हैं। महिलाएं…
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इनके पास न घर है न मुकम्मल पहचान पत्र

पेट में भूख की आग लिये अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते, जीवन जीने की जिजीविषा के बीच चोरी करना, भीख मांगना, बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी करना, यहां तक…
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