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poetry

मुस्तफा हुसैन ‘मुश्फिक’ की गीत-यात्रा

कनखी कनखी तकी चुनरिया फूटी रस की  कहां बदरिया  गरल पात्र भर गये सुधा में हम भी भींगे वर्षा में । भींगों भाई कौन रोक सकता है, आपको अब तो आप…
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