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samajik karykarta
लेखक समाज के आगे मशाल लेकर चलता है यह मुहावरा अब भ्रम पैदा करता है
अजीब बात है कि जब मैं किसी कथा समारोह या लेखकीय जमावड़े में जाती हूं तो अमूमन मेरा परिचय एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में दिया जाता है और जब मैं महिलाओं की कार्यशाला या किसी महिला अधिवेशन में जाती हूं तो मेरा परिचय हिन्दी की जानी मानी लेखिका कहकर करवाया जाता है।
आज ख़ामोश हो गई महिलाओं की मुखर आवाज़
कई महिलाओं की मुखर आवाज़ बनने वाली आज खामोश हो गई है। महिला वर्ग की विभिन्न लड़ाई लड़ने वाली जानी-मानी सामाजिक कर्याकर्ता कमला भसीन...

