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shatranj ke khiladi
मुज़फ्फ़र अली और उनका सिनेमा
मुज़फ्फ़र अली ने गमन (1978), उमराव जान (1981), आगमन (1982), अंजुमन (1986), जाँनिसार (2015) जूनी (अप्रदर्शित) अवधी संस्कृति (लोकजीवन), उसकी उपलब्धियों और समस्यायों को फ़िल्मी परदे पर पहचान दिलाने का प्रशंसनीय काम किया। उन्होंने कम फ़िल्में बनाई लेकिन जब भी बनाया मन से सार्थक एवं उदेश्यपरक फ़िल्में निर्मित की जिसे दर्शकों और समीक्षकों ने सराहा। मुजफ्फर अली साहब की फिल्मों में अवध की संस्कृति है, ठुमरी है, मर्सिया है, हसीन शाम-ए-अवध की फिज़ा में ग़ज़ल पेश करती तवायफें हैं जिनकी नजाकत-नफासत और अदाओं के पीछे अपने दुःख-दर्द और तन्हाई है।

