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Sports and cinema
खिलाड़ियों का जीवन संघर्ष और सिनेमा के पर्दे पर उनकी छवियाँ
राष्ट्रवाद और देश प्रेम को फ्रेम में रखकर पिछले एक दशक में खेलों पर आधारित कई फिल्मे बॉलीवुड में बनी हैं। बड़े और सफल खिलाड़ियों के जीवन पर आधारित बायोपिक फ़िल्में बनाने का चलन बढ़ा है और ऐसी फिल्मे सफल भी रही हैं। ओलम्पिक खेलों के समय असम की मुक्केबाज लवलीना के गाँव तक जाने वाली सडक को पक्की बनाया जा रहा था। राष्ट्रीय स्तर तक खेल चुके खिलाडियों के गाँव तक जाने की सडकें और अच्छे स्टेडियम का उपलब्ध न होना एक बड़ी बाधा है। कोच और ट्रेनिंग और खान-पान की स्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना अपरिहार्य है। प्रतिभावान खिलाड़ी सामने आये इसके लिए केवल जीतने वाले खिलाड़ियों को ही नौकरी और इनाम नहीं मिलने चाहिये बल्कि सभी खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने अपना समय और कैरियर दाँव पर लगाया होता है।

