Wednesday, May 22, 2024

हरिश्चंद्र

लेखक गाँव के लोग से जुड़े हुए हैं।

चंदौली में तीन सफाईकर्मियों की मौत : क्यों नहीं टूट रही है प्रशासन की नींद?

हमारे देश में संसद में कानून तो बन जाते हैं लेकिन कागजों पर, उन पर अमल नहीं होता और जब अमल नहीं होता तो उसका खामियाजा जनता को उठाना पड़ता है। वर्ष 2013 में संसद ने मैनुअल स्कैवेंजर्स और उनके पुनर्वास के रूप में रोज़गार का निषेध अधिनियम के आ जाने के बाद भी सीवर के सफाई मशीनों से न करके मैनुअल तरीके से की जा रही है।आखिर ऐसा क्यों? और मेनुअली सफाई करने वाले कर्मियों की मौतों की जिम्मेदारी किसकी होगी?

सोनभद्र : पीने के पानी के संकट से जूझते सुकृत और आस-पास के गाँव

उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला सोनभद्र, देश के चार राज्यों मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, बिहार और झारखंड की सीमाओं से घिरा हुआ है। खनिज और प्राकृतिक संपदाओं से सम्पन्न इस जिले के बहुत से गाँव के निवासी पानी, सड़क, बिजली जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। हर घर नल और नल में जल का दावा करने वाली डबल इंजन की सरकार की वास्तविकता यहाँ पहुँचने पर मालूम हुई। सोनभद्र जिले के सुकृत और उसके आसपास के गांवों में पानी को लेकर ग्रामीणों की स्थिति क्या है? पढिए हरिश्चंद्र की ग्राउन्ड रिपोर्ट

ईवीएम भरोसेमंद नहीं, मतपत्रों से ही हो चुनाव में – सोशलिस्ट पार्टी इंडिया

इस प्रदर्शन का उद्देश्य मात्र इतना है कि ई.वी.एम. के बारे में भारत का निर्वाचन आयोग जो दावे कर रहा है कि ई.वी.एम. में कोई गड़बडी नहीं हो सकती, हम उसको गलत साबित कर रहे हैं।