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अनूप मणि त्रिपाठी

वास्तविक नहीं सात्विक कहानियाँ

(एक) जुलूस निकल रहा था। भीड़ नारे लगा रही थी। बहुतों के हाथों में एक रंग के झण्डे लहरा रहे थे। जिनके हाथों में झण्डे नहीं थे, वे अपने हाथों…
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इन दिनों कट्टर हो रहा हूँ मैं…                 

आजकल मैं बहुत हीन भावना में जी रहा हूँ । सामान्यतौर पर मैं सामान्य मनुष्य के जैसा जीवन ही जीना चाहता रहा हूँ। मगर अब देख रहा हूँ कि ऐसा…
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