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#मक्खलि गोसाल

मत करिए कबीर-रैदास की तुलना मार्क्स से (डायरी 17 फरवरी, 2022)

सवर्ण लेखकों और दलित-बहुजन लेखकों में फर्क करना मुश्किल काम नहीं है। सवर्ण लेखकों की खासियत यह होती है कि उनके लेखन के केंद्र उनके अपने विषय…
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