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इलाहाबाद विवि : छात्रसंघ बहाली की मांग करते हुए दीक्षांत समारोह में योगी के आगमन का कर रहे हैं विरोध
वर्ष 2014 के बाद पूरे देश में सांप्रदायिक ताकतों के साथ भगवाकरण की राजनीति ने जोर पकड़ा है। देश के बड़े विवि से लेकर विद्यालयों तक में इसका असर देखने को मिल रहा है। इन संस्थानों में नियुक्ति से लेकर पाठ्यक्रम तक का खुल कर भगवाकरण किया जा रहा है। जो इस रंग में नहीं रंगे उन्हें देशद्रोही और अर्बन नक्सली कह जेल में डाल दिया गया। यही स्थिति पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाला इलाहाबाद केन्द्रीय विवि की है, जहां 27 नवंबर को होने वाले दीक्षांत समारोह में विवि की रेक्टर माननीया आनंदी बेन पटेल को आमंत्रित न कर सांप्रदायिक बयान देने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित किया गया है। जिसका सभी छात्र दल विरोध कर रहे हैं।
इलाहाबाद विवि में छात्रसंघ भवन में नेता मुलायम सिंह यादव की पुण्यतिथि पर याद किया गया
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन पर समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव जी की पुण्यतिथि मनाई गई। इस मौके पर सैकड़ो की तादाद में छात्र उपस्थित रहे।
आदिवासी समाज में पुरुषवर्चस्व की शिनाख्त
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आदिवासी समाज में पुरुषवर्चस्व की शिनाख्त डॉ रजनी मुर्मू डॉ जनार्दन गोंड अपर्णा #gaonkelog #banaras #varanasi #kashi Gmail - gaonkelogbsb@gmail.com
भेड़ियों की गाथाओं के बीच हिरणों की आत्मकथा की तरह
उर्मिलेश पेशे से पत्रकार हैं। जिस प्रकार की ईमानदारी और साहस का परिचय वह पत्रकारिता में देते हैं, वैसा ही इन संस्मरणों में। संस्मरण में आये सभी किरदारों का उर्मिलेश जैसा विश्लेषण करते हैं उससे उर्मिलेश के व्यक्तित्व और उनकी पक्षधरता का भी पता चलता है। निस्संदेह, उर्मिलेश जनपक्षधर पत्रकार और बुद्धिजीवी हैं। उर्मिलेश की भाषा-शैली, वर्णन-शैली अद्वितीय है। इन सभी संस्मरणों में एक रोचकता भी है। वास्तव में, 'गाज़ीपुर में क्रिस्टोफर कॉडवेल' न सिर्फ़ संस्मरण भर है, बल्कि अत्यंत सुसंगत और तथ्यों पर आधारित वाम और बहुजन वैचारिकी की सच्ची आलोचना भी है जिसे स्वीकार करके ही इन दोनों महत्वपूर्ण खेमों का सुसंगठित विकास सम्भव है।

