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महाराष्ट्र के दलित लेखकों से प्रेरणा लें बहुजन बुद्धिजीवी
आज किस तरह दलित नेता अपने निजी स्वार्थों के चलते बलात्कारियों के पक्ष और दंगाइयों के पक्ष में रैलियां निकालती सत्ता की ताल में ताल मिला कर चुप्पी साधे हुए हैं और हमें इस संघर्ष में जूझने के लिए अकेला छोड़ दिया है। कहां है वे पूनापेक्ट समझौते के आरक्षण से संसद में पहुंचे हुए 131 सांसद? ऐसे में सत्ता और प्रशासन अपने मनमाने ढंग से दलितों को हांक रही है।
बकवास करने का अधिकार केवल ब्राह्मण वर्गों को है (डायरी 21 मई, 2022)
ब्राह्मणों की भावनाएं बहुत जल्दी आहत हो जाती हैं। लेकिन 85 फीसदी दलित-बहुजनों की भावनाएं क्यों आहत नहीं होतीं? अब कल की ही बात जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित महोदया ने कहा है कि भारत को संविधान के दायरे में सीमित नागरिक राष्ट्र के रूप में नहीं रखा जाना चाहिए। कल वह दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उनका कहना है कि भारत को अपने अतीत की सभ्यता को माननेवाला राष्ट्र होना चाहिए।
अभिव्यक्ति की आज़ादी का गला घोंटने की साजिश
जाने-माने चिन्तक-लेखक और प्रखर वक्ता डॉ रतनलाल द्वारा संचालित यूट्यूब चैनल आंबेडकरनामा हैक कर लिया गया है सिर्फ वही नहीं कई अन्य ऐसे चैनल...

