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Anytha patrika
स्त्री सशक्तीकरण और जागरुकता के लिए स्त्री विमर्श एक कारगर औजार है
आधुनिकता और उदार सोच के तमाम दावों के बावजूद स्त्री की सामाजिक स्थिति या उत्थान में कोई बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन नहीं आया है। आज भी वे समझौतों और दोहरे कार्यभार के बीच पिस रही हैं। पुरुश सत्ता की नीवें हमारे समाज में बहुत गहरे तक धंसी हुई हैं। इसे तोडना, बदलना या संवारना एक लम्बी लड़ाई है। हर क्षेत्र में स्त्रियां अपनी- अपनी तरह से अपनी लड़ाई लड़ रही हैं।

