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mirza ghalib

रेवड़ियों का मतलब मैं तो यही समझता हूं और आप? (डायरी, 17 जुलाई, 2022) 

कबीर को पढ़ना अच्छा लगता है। कई बार सोचा कि ऐसा क्या है कबीर के पदों में कि मैं हर बार उसमें डूबता चला जाता हूं? कल रात भी यह ख्याल तब आया…
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कफनचोर (डायरी 6 नवंबर, 2021)

साहित्य को लेकर एक सवाल मेरी जेहन में हमेशा बना रहता है। सवाल यही कि उस साहित्य को क्या कहा जाय, जिसके पात्र और साहित्य में शामिल घटनाएं…
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आरक्षण मजाक का विषय नहीं है जज महोदय (डायरी 22 अक्टूबर, 2021)

समाज को देखने-समझने के दो नजरिए हो सकते हैं। फिर चाहे वह दाता और याचक के नजरिए से देखें या फिर श्रमजीवी और परजीवी के नजरिए से। संसाधन रहित…
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