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Radhika studio shikohabad
बाज़ार की मुनाफाखोर प्रवृत्ति ने एक लोककला को अश्लीलता के शिखर पर पहुंचा दिया
यह नृत्य देहाती जीवन की अनेक विद्रूपताओं को हमारे सामने रखता है। बेशक यह हास्य और लास्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है लेकिन यह तमाम रूढ़ियों और वर्जनाओं के बीच पिसते हुये जीवन को बड़ी मार्मिकता से कह देता है। स्त्रियों के प्रति तमाम धारणाओं और रवैयों के प्रच्छन्न रूपों को हम इनमें देख सकते हैं । स्त्रियों के ऊपर लदी हुई पितृसत्ता में किस तरह उनके मोलेस्टेशन और दमन को नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है यह इस नृत्य में आसानी से देखा जा सकता है।

