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उत्तराखंड : उपलब्ध नौकरियों की तुलना में अधिक लोग बन रहे श्रम-बल का हिस्सा

राज्य के लिए बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। रोज़गार के सीमित अवसरों के कारण बेरोजगारों की संख्या में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है, जिसके चलते युवाओं द्वारा परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार करने के उद्देश्य से अन्य राज्यों का रुख किया जा रहा है। इससे राज्य में पलायन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।

संसाधनों के बावजूद विकसित नहीं है उत्तराखंड, लगातार बढ़ रहा है पलायन

राज्य में आय का एक बड़ा स्रोत होने के बावजूद ग्रामीण रोज़गार के लिए शहर जाने को मजबूर हो जाते हैं। दूसरी ओर इन संसाधनों के अंधाधुंध इस्तेमाल से अब यह सीमित मात्रा में रह गए हैं। यदि तेज़ी से संसाधनों का पलायन न रोका गया तो उत्तराखंड और विशेषकर उसके ग्रामीण क्षेत्रों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि मानव की अपेक्षाएं असीमित हैं, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों की मात्रा सीमित है।

बकरी पालन से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं

बिहार सरकार अनुसूचित जाति/जनजाति, पिछड़ी जाति और सामान्य वर्ग को अलग-अलग दर से अनुदान दिया जाता है। सामान्य वर्ग को 50 प्रतिशत एवं अन्य जातियों को 60 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का प्रावधान है। 20 बकरियों के साथ एक बकरा पालने के लिए लगभग 2 लाख की राशि दी जा रही है। इसके लिए ब्लाॅक व जिला स्तर पर पशुपालन विभाग में फाॅर्म आवेदन करना होता है। आवेदन की जांचोपरांत लाभुक को सब्सिडी राशि बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिया जाता है। राज्य सरकार प्रोत्साहन राशि दो किस्तों में देती है। इसके लिए बैंक से ऋण भी मुहैया कराया जाता है। सभी प्रक्रिया पशुपालन विभाग और बैंक के जरिए किसानों, मजदूरों व भूमिहीनों की आजीविका के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

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