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भाजपा शासन के ग्यारह वर्ष : संविधान और धर्मनिरपेक्षता का लगातार दमन

पिछले 11 वर्षों से केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों पर नियंत्रण रखते हुए, ये ताकतें संविधान के तीन स्तंभों..धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और संघवाद  को कमज़ोर करने और उसकी जगह समाज के एक अंधकारमय, मध्ययुगीन दृष्टिकोण पर आधारित एक फ़ासीवादी हिंदू राष्ट्र स्थापित करने के लिए जी-जान से जुटी हैं।

आखिर हिन्दू राष्ट्रवादियों के आँख की किरकिरी क्यों बना हुआ है संविधान में धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद

आरएसएस/भाजपा की कार्यशैली काफी जटिल है। वो एक-साथ कई विरोधभासी बातें कर सकते हैं और करते हैं। वे छोटे-छोटे कदम उठाकर संविधान के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं और साथ ही संविधान के मूल्यों और नीतियों का उल्लंघन भी कर रहे हैं। पिछले एक दशक से हम यही देख रहे हैं। होसबोले का बयान एक सोची-समझी रणनीति के तहत दिया गया है।

भारत में यूरोपीय ढंग के राष्ट्रवाद की विकास यात्रा कैसे चल रही है

हिंदू महासभा भी थी और हिंदू राष्ट्रवादी तत्वों के एक तबके ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में भी घुसपैठ कर ली थी। जवाहरलाल नेहरू को इसके कारण भारतीय राष्ट्रवाद के लिए उत्पन्न हुए खतरे का एहसास हो गया था किंतु विभिन्न कारणों से वे इसे जड़ से उखाड़ नहीं पाए, जिनमें से एक था भारत में जमींदारी प्रथा का कायम रहना। यह समाज में बढ़ती धार्मिकता में भी प्रतिबिंबित होता था। 

क्या धर्मनिरपेक्षता पश्चिम का थोपा हुआ विचार है?

भारत में हिन्दू धर्म के बारे में कहा जाता है कि वह पारंपरिक अर्थ में धर्म नहीं है। यह केवल लोगों को भ्रमित करने का तरीका है। जो लोग धर्म का रक्षक होने का दावा करते हैं वे दरअसल जाति और लिंग पर आधारित प्राचीन ऊंच-नीच को बनाए रखना चाहते है। ये ताकतें प्रजातंत्र के आगाज़ से पहले की दुनिया वापस लाना चाहती हैं। वे नहीं चाहतीं कि हर व्यक्ति का एक वोट हो। वे चाहतीं हैं कि राजा को ईश्वर से जोड़ा जाए और पुरोहित वर्ग उसे सहारा दे। 

 भविष्य की भयावह तस्वीर :1984

नई ज़बान की शब्दाबली की संरचना को समझने की जरूरत है। इसके लिए 1984 आपको एक परिशिष्ट भी देता है। उपन्यासों में ऐसे प्रयोग बहुत ही कम देखने को मिलते हैं। इसे साहित्य में एक नये प्रयोग के तौर पर भी आप देख सकते हैं जो तर्कसंगत लगता है।

‘स्वर्णिम युग’ और ‘महानायक’ तलाशती जातियां

बचपन में कहानियों में पढ़ा था कि कबीर के मरने पर हिन्दू और मुसलमानों के बीच उनके धर्म को लेकर झगड़ा हो गया और...

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