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तेईस मार्च को भगत सिंह और लोहिया को याद करने के मायने
डॉ. राम मनोहर लोहिया फ़ासीवाद, पूँजीवाद और साम्राज्यवाद-विरोधी थे लेकिन समाजवाद के समर्थक थे। डॉ लोहिया का जर्मनी की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ एक गहरा बौद्धिक और वैचारिक जुड़ाव था। इसी प्रभाव के चलते, 1934 में जर्मनी से लौटने के बाद, उन्होंने (24 वर्ष की आयु में) 'कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी' की स्थापना में सक्रिय योगदान दिया। वे इसकी कार्यकारिणी समिति के सदस्य बने और पार्टी के मुखपत्र, 'कांग्रेस सोशलिस्ट' के संपादक नियुक्त किए गए। आज उनकी 116 वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए पढ़िए डॉ सुरेश खैरनार का यह लेख।
बनारस में ‘बापू’ से जुड़े धरोहरों को संरक्षित करने की उठी माँग
ज्ञातव्य है की आज ही के दिन यानि 30 जनवरी 1948 में महात्मा गाँधी की नृशंस हत्या कर दी गयी थी। देश आज़ाद होने...
गांधी और आज उनके हत्यारे(डायरी 31 जनवरी, 2022)
कल राजघाट गया था। दिल्ली में रहते हुए 30 जनवरी को राजघाट जाकर महामानव गांधी को श्रद्धांजलि देने का यह पहला मौका था। वहां...

