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बकवास करने का अधिकार केवल ब्राह्मण वर्गों को है (डायरी 21 मई, 2022)
ब्राह्मणों की भावनाएं बहुत जल्दी आहत हो जाती हैं। लेकिन 85 फीसदी दलित-बहुजनों की भावनाएं क्यों आहत नहीं होतीं? अब कल की ही बात जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित महोदया ने कहा है कि भारत को संविधान के दायरे में सीमित नागरिक राष्ट्र के रूप में नहीं रखा जाना चाहिए। कल वह दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उनका कहना है कि भारत को अपने अतीत की सभ्यता को माननेवाला राष्ट्र होना चाहिए।

