नयी दिल्ली। पंचायती राज मंत्रालय ने कहा कि पेसा अधिनियम को मजबूत बनाने को लेकर पुणे में आज से दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन शुरू हो रहा है।
पंचायत (अनुसूचित क्षेत्र विस्तार) अधिनियम (पेसा) 1996, राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को विशेष रूप से प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए विशेष अधिकार देता है।
बुधवार को एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन अकादमी में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। सम्मेलन में पाँचवीं अनुसूची के अन्तर्गत आने वाले राज्य भाग लेने वाले पांच राज्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश अपनी संक्षिप्त प्रस्तुति देंगे।
पेसा कानून जल,जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए एक महत्त्वपूर्ण कानून है। यह आदिवासी क्षेत्रों में उनके जमीन और जंगल के अधिकारों को संरक्षित करने का अधिकार प्रदान करता है क्योंकि आदिवासी इन्हीं जंगलों पर आश्रित होते हैं ।
पंचयाती राज व्यवस्था में पेसा अर्थात पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरियाज ऐक्ट 1986 अनुसूचित क्षेत्रों के विस्तार के लिए यह कानून लाया गया। पेसा कानून 24 दिसम्बर 1996 में लागू किया गया था। यह कानून आदिवासियों की रीढ़ है। आदिवासियों के जमीन के अधिकारों को मजबूती देने के लिए इस कानून को लाया गया। इस कानून को लागू किए जाने का मुख्य उद्देश्य है
अनुसूचित क्षेत्र वे आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं, जो सरकार के विशेष तंत्र के अधीन होता है। इसका मतलब कि इन क्क्षेत्रों में रहने वाली आदिवासी जनजातियों की सांस्कृतिक परंपरा और आर्थिक हित, जो जंगलों पर आधारित होता है, जिससे उनका जीवनयापन होता है को बचाने और सहजने में मुख्य भूमिका निभाते है। यह संविधान के पाँचवीं और छठवीं अनुसूची उल्लेखित है।
- संविधान के भाग 9 के पंचायत से जुड़े प्रावधानों को संशोधनों के साथ अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तारित करना।
- जनजातीय समुदाय को स्वशासन का अधिकार देना।
- अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के प्राकृतिक संसाधनों पर पारंपरिक अधिकारों को मान्यता देना।
- , जो मुख्य रूप से आदिवासी प्रकृति के हैं, को अधिक स्वायत्ता प्रदान करना और भूमि और जंगल पर उनके अधिकारों की रक्षा करना।
पेसा अधिनियम का महत्व और विशेषताएं
यह अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के प्राकृतिक संसाधनों पर पारंपरिक अधिकारों को मान्यता देता है। आदिवासी इलाकों में आने वाली नई परियोजनाओं को अपने इलाके में स्थापित करवाना है या नहीं इसकी सहमति पेसा कानून के अंतर्गत ग्राम सभा में ही तय किया जाता है। स्थानीय शासन में सहभागी लोकतंत्र की स्थापना कर ग्राम सभा को समस्त कार्यों में इसका महत्वपूर्ण कार्य है।
जातीय समुदायों की परंपराओं और रीति-रिवाजों को बनाए रखने और उनकी रक्षा करना।
पंचायतों को आदिवासी जरूरतों को ठीक से पूरा करने के लिए आवश्यक सटीक शक्ति देने में महत्व पूर्ण भूमिका निभाना
ग्राम सभा के उच्च स्तर के पंचायतों को निचले स्तर पर पंचायतों के कार्यों और शक्तियों को लेने से रोकना।
इसके अंतर्गत गांवों खासकर पाँचवीं और छठवीं अनुसूची में आने वाले आदिवासी बहुल गाँव जमीन के किसी भी मामले के निर्णय ग्रामसभा में पारित किया जाएगा। इस कानून में प्रावधान है कि आदिवासी अपनी जमीनों की आर्थिक उपयोगिता को नहीं बदल पाएंगे। यदि वे इसे बदलना चाहते हैं तो ग्रामसभा की अनुमति जरूरी होगी। यहाँ जल,जंगल और जमीन से संबंधित सारे अधिकार ग्रामसभा में रखे जाएंगे उनकी अनुमति से ही आगे के निर्णय तय होंगे।
लेकिन विकास के नाम पर पुलिस-प्रशासन और शासन पेसा कानून को दरकिनार कर आदिवासियों को उनके जल,जंगल,जमीन से बेदखल कर रही है।
पुणे में होने वाले दो दिवसीय सम्मेलन में पेसा कानून को किस तरह और मजबूत किया जाए इस विषय पर बातचीत होगी।




